
भाग्य से शिकायत मत करो, तुम्ही हो अपने भाग्य के विधाता
ग्वालियर. इंसान को दुनियाभर से बहुत शिकायत होती है, यह ऐसा है यह वैसा है, और तो और दूसरों के साथ-साथ लोगों को अपने भाग्य से भी शिकायत होने लगती है। अरे भाई इस भाग्य के विधाता तो तुम स्वयं ही हो। तुम्हारे ही कर्मों के अनुसार ही भाग्य बनता है। जैसे हमारे कर्म होंगे वैसा ही होगा भाग्य। यह तो निश्चित है कि जैसे बीज बोओगे वैसा ही फल मिलेगा। हां यह बात जरूर है कि कर्म सिद्वांत में कभी-कभी तो कर्मों का फल तुरंत मिलता है और कुछ कर्मों का फल वर्षों या जन्मों के बाद मिलता है। यह बात शनिवार को जैन मुनि अविचल सागर महाराज ने नया बाजार जैन मंदिर में आध्यात्मिक प्रवचन सभा को सम्बोधित करते हुए कही।
दुख-पीड़ा मिलना तो लाईफ ऑफ पार्ट है इनसे घवराओ मत
जैन मुनि अविचल सागर ने कहा कि ऐसा कौन सा व्यक्ति है जिसके जीवन में दुख न हो, पीड़ा न हो। अरे दु:खों से तो भगवान का जीवन भी नहीं बच पाया तो हम कहां बच सकते हैं। मैं कह सकता हूं सुख और दुख तो लाईफ ऑफ पार्ट है। हां यह बात अवश्य है कि जो लोग सुख में संयममय जीवन जीते है और दु:ख के समय धैर्य रखते हुए उन दु:खों को अपने ही कर्म का फल मानते हुए सहज भाव से जीवन जीते हैं उनमें दु:खों को सहन करने की क्षमता बढ़ जाती है और हंसते-हंसते हुऐ दु:ख-पीड़ा में भी आनंदमय जीवन जीते हैं।
दूसरों की निंदा करके कर्म का संचय मत करो
देखने में आता है कि कुछ लोग बेवजह ही दूसरों की निंदा करते हैं यह निंदा करना उनकी आदत बन जाता है। मैं कहता हूं इस आदत को छोडऩा होगा, क्योंकि दूसरों की निंदा करके तुम स्वयं के कर्मों का संचय करते हो और एक दिन इन कर्मो को तुम्हें भोगना होगा।
Published on:
19 Oct 2019 09:24 pm
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