
सिर पर कलश रखकर निकलीं 151 महिलाएं,जगह-जगह हुआ स्वागत
ग्वालियर। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर से कलश यात्रा निकाली गई। यह कलश यात्रा में 151 महिलाएं सिर पर कलश लेकर शामिल हुईं। कलश यात्रा बैंडबाजे की धुन के साथ सुबह सात बजे शुरू हुई जो अनेक मार्गों से होते हुए आयोजन स्थल तक पहुंची। कलश यात्रा में भगवान लक्ष्मी नारायण का रथ भी शामिल किया गया जिसे 21 श्रद्धालुओं द्वारा खींचा गया। कलश यात्रा का जगह-जगह फूल बरसा कर स्वागत किया गया ।
श्री लक्ष्मी नारायण वैभव लक्ष्मी यज्ञ के पहले दिन प्रथम दिन मूर्ति स्थापना प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके बाद पाठ शुरू हुआ। अग्निदेव का आह्वान के साथ यज्ञ वेदी प्रज्वलित की गई। यज्ञ के प्रथम दिन मुख्य यजमान अलावा एक दर्जन श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सात ब्राह्मणों द्वारा पूजन कराया गया। यह यज्ञ प्रतिदिन सुबह नौ बजे से 12 तक चलेगा। दोपहर में 2 बजे से 4 बजे तक चलेगा।
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भागवत कथा सुनने से पापों का होता है हरण
श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से पापों का हरण होता है। यह कथा सौभाग्य प्राप्त होने के बाद ही सुनने को मिलती है। यह बात दादाजी धाम धर्मपुरी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन करते हुए रमेश लाल ने कही।उन्होंने कहा कि जिसे ईश्वर के चरणों से प्रेम होता है। ईश्वर भी अपने भक्त पर उतना प्रेम दिखाता है। अपने भक्त को ईश्वर कभी कष्ट में नहीं देख पाता है। उन्होंने कहा कि अधिकमास की कथा को सुनाया और मायाभक्ति के बीच का अंतर बताया।
उन्होंने कहा कि माया संसार के सत्य को छिपाती है। भौतिक वादी सुख सुविधा एवं विलासता दिखाती है। वही भक्ति संसार के सच्चे रहस्यांें को दिखाती है। परमब्रह्म का ज्ञान कराती है। सुंदरता से अभिव्यक्त कियाजीव सारा जीवन माया के पीछे भागता है। वही भक्ति भगवान पर रीछता है। उसे ईश्वर के अतिरिक्त कोई सुंदर नहीं दिखता।
Published on:
07 Jun 2018 07:46 pm
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