
ग्वालियर। ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कॉस्ट में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने ६६ मेडल के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया। जिसमें देश के विभिन्न राज्यों के खिलाडि़यों ने अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रदेश में 11 खेल अकादमी हैं जिन पर प्रतिवर्ष करीब 15 करोड़ रुपए खर्च होते हैं, इसके बावजूद एक भी खिलाड़ी पदक लाने में नाकाम रहा।
प्रदेश में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के तहत 11 खेल अकादमी हैं, जिनमें से 6 अकेले भोपाल में हैं। अकादमी में रहने वाले खिलाडि़यों को मिलने वाली सुविधाएं और स्टाफ के वेतन को मिलाकर एक अकादमी का खर्च 70 लाख से 1.5 करोड़ तक आता है। ग्वालियर की बात करें तो यहां दो अकादमी हैं, बेडमिंटन और हॉकी। हॉकी अकादमी का प्रदर्शन तो ठीक रहा है और अभी तक यहां से २४ अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकले लेकिन बेडमिंटन अकादमी का प्रदर्शन निराशाजनक है, यहां 6 वर्ष में 3 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी ही मिले हैं।
खेल अकादमी
बीते 10 सालों में खेलों की स्थिति प्रदेश में सुधरी है। कई बार एेसा होता है कि सफलता नहीं मिलती। उम्मीद है कि आने वाले एशियन गेम्स में हम अच्छा करेंगे।
यशोधराराजे सिंधिया, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री
कॉमनवेल्थ में जो खेल शामिल हैं उनमें से हमारे प्रदेश में काफी कम खेल खेले जाते हैं, जिसके कारण कॉम्पीटिशन टफ हो जाता है। यही कारण है कि इस बार हमें एक भी मेडल नहीं मिला।
उपेन्द्र जैन, डायरेक्टर खेल एवं युवा कल्याण विभाग
Published on:
22 Apr 2018 11:33 am
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