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जेल सुधार में बड़ा कदम: महिला बंदियों को भी मिलेगी खुली जेल की सुविधा, सुरक्षा के लिए 18 करोड़ मंजूर

सभी जेलों में इलेक्ट्रिक फेंसिंग की तैयारी, 10% महिला कैदियों को कुटिया में रहने का अवसर

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मध्यप्रदेश की जेल व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा में पहल की गई है।

मध्यप्रदेश की जेल व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा में पहल की गई है।

ग्वालियर। मध्यप्रदेश की जेल व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा में पहल की गई है। अब तक खुली जेल की सुविधा से वंचित रही महिला बंदियों को भी जल्द इसका लाभ मिल सकेगा। इस संबंध में विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे लागू करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है।
ग्वालियर सेंट्रल जेल में आयोजित शांति संदेश कार्यक्रम के दौरान जेल महानिदेशक (डीजी) डॉ. वरुण कपूर ने यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राज्य में जेल सुधार को लेकर लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं और महिला बंदियों के लिए खुली जेल की व्यवस्था उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। प्रस्ताव के अनुसार, लगभग 10 प्रतिशत महिला कैदियों को कुटिया (ओपन जेल यूनिट) में रहने का अवसर दिया जाएगा, जहां वे अपेक्षाकृत खुले और आत्मनिर्भर माहौल में जीवन व्यतीत कर सकेंगी।
कार्यक्रम में आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए स्वामी सुतीक्ष्णदास देवाचार्य महाराज भी उपस्थित रहे। उन्होंने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति को अपराध से घृणा करनी चाहिए, अपराधी से नहीं। सही मार्गदर्शन, आत्मचिंतन और सकारात्मक सोच के माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में सुधार ला सकता है। कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों को आध्यात्मिकता से जोड़कर उन्हें नई दिशा देना था।
डॉ. कपूर ने आगे बताया कि जेलों की सुरक्षा और आधारभूत व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए 18 करोड़ रुपए की योजना स्वीकृत की गई है। अभी तक प्रदेश की केवल 15 जेलों में ही इलेक्ट्रिक फेंसिंग की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन अब इसे सभी जेलों में लागू किया जाएगा। ग्वालियर सेंट्रल जेल में पहले से ही इलेक्ट्रिक फेंसिंग की व्यवस्था मौजूद है, जिससे सुरक्षा स्तर बेहतर बना हुआ है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा जेलों को सिर्फ सजा देने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का केंद्र बनाना है। इसके तहत बंदियों को कौशल विकास, मानसिक परामर्श और आध्यात्मिक मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि वे सजा पूरी करने के बाद समाज की मुख्यधारा में बेहतर तरीके से लौट सकें।
यह पहल न केवल महिला बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में अहम मानी जा रही है, बल्कि प्रदेश की जेल व्यवस्था को अधिक मानवीय और सुधारात्मक बनाने की ओर भी एक मजबूत कदम है।