
ग्वालियर। ११ वीं की छात्रा मोनिका शिवहरे ने किले से कूदकर सुसाइड किया या उसे धक्का दिया था, २९ दिन बाद भी पता नहीं चला है। मोनिका के परिजन कह रहे हैं बेटी सुसाइड नहीं कर सकती। उसे सहपाठी किले ले गया था। उसने ही उसको धकेला है लेकिन पुलिस उसका मुंह नहीं खुलवा पा रही है।
11 नवंबर को मोनिका करीब 59 मिनट तक किले पर उसके साथ थी। इसके अलावा मोनिका की हथेली पर लिखे सीडी शब्द से भी मामले में नया मोड़ आ गया है। उसने हिंदी शब्दों के बीच अंग्रेजी में सीडी लिखा है। सवाल उठता है वह इस बारे में क्या बताना चाहती थी। वह किस बात से परेशान थी। पुलिस का कहना है मोनिका की हथेली पर 5-6 शब्दों की इबारत लिखी थी, लेकिन अधिकतर शब्द अध मिटरे (धुंधले) होने से पढऩा मुश्किल था। पोस्टमार्टम चिकित्सक से इबारत स्पष्ट करने को कहा है। लेकिन रिपोर्ट नहीं मिली है।
मोनिका के भाई ने कहा- सबूत देने के बाद पुलिस चुप
मनीष शिवहरे निवासी सत्यनारायण की टेकरी का कहना है बहन की मौत के केस में पुलिस का रवैया सुस्त है। बहन की मौत की जानकारी सहपाठी को है क्योंकि 11 नवंबर को मोनिका के साथ लास्ट सीन में कोचिंग का सहपाठी और उसका दोस्त था। दोनों लड़के और मोनिका कोचिंग से निकलने के बाद सीसीटीवी में 10.59 बजे किले पर जाते दिखे हैं। करीब ५९ मिनट बाद दोनों छात्र लौटे पर मोनिका उनके साथ नहीं थी। जबकि 12.10 पर पुलिस शव के पास पहुंच गई। जाहिर है मोनिका के सहपाठी को घटनाक्रम का पता है। फिर पुलिस उससे सच क्यों नहीं उगलवा रही है।
यह है आरोप
१. मोनिका के साथ सहपाठी और उसके दोस्त के फुटेज देने के बाद भी पुलिस ने संदेही सहपाठी से सिर्फ औपचारिक पूछताछ की।
2. कांटे साहब का बगीचा में रहने वाली सहेली को इसकी जानकारी होगी लेकिन उससे भी कोई क्लू पुलिस नहीं हासिल कर सकी।
3. फुटेज में किले जाते दिख रहे सहपाठी से मोनिका की ९ नवंबर को मोबाइल पर ४५ मिनट बात हुई। इसका भी खुलासा नहीं हुआ।
Published on:
02 Dec 2017 11:01 am
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