
अफसरों ने सांठगांठ कर ५.८३ लाख का काम ३३.५४ लाख में कराया
झाबुआ. यहां के बहुचर्चित प्रिंटिंग घोटाला अपने आप में किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। आदेश शासकीय मुद्रणालय भोपाल के लिए निकाला, लेकिन बिना किसी प्रक्रिया का पालन किए भोपाल के राहुल प्रिंटर्स को दे दिया गया है। इसमें जो काम 5 लाख 83 हजार 891 रुपए में किया जा सकता था। उसके लिए 33 लाख 54 हजार 616 रुपए का भुगतान किया गया। यानी सीधे तौर पर शासन को 27 लाख 70 हजार 725 रुपए का नुकसान हुआ।
इस मामले को झाबुआ के तत्कालीन कलेक्टर जगदीश शर्मा, तत्कालीन जिपं सीइओ जगमोहन धुर्वे,, तत्कालीन परियोजना अधिकारी (तकनीकी) नाथूसिंह तंवर, जिपं में स्वच्छता मिशन के तत्कालीन जिला समन्वयक स्वच्छता मिशन अमित दुबे, जिपं के तत्कालीन वरिष्ठ लेखा अधिकारी सदाशिव डाबर, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तत्कालीन लेखाधिकारी आशीष कदम ने मेसर्स राहुल प्रिंटर्स भोपाल के संचालक मुकेश शर्मा के साथ मिलकर अंजाम दिया। लोकायुक्त जांच में हुई भ्रष्टाचार की पुष्टि इसकी पुष्टि लोकायुक्त की जांच में भी हुई। जांच में शासकीय मुद्रा एवं लेखन सामग्री भोपाल के उप नियंत्रक एके खंडूरी व देवदत्त पिता रविदत्त का नाम भी सामने आया था, जिन्हें न्यायालय ने दोष मुक्त किया है।राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में नंदन फलोद्यान के लिए एक्जिट प्रोटोकॉल रजिस्टर, समग्र स्वच्छता अभियान के तहत प्रचार प्रचार के लिए पोस्टर और पंपलेट प्रिंटिंग, एक्जिट प्रोटोकॉल संधारण रजिस्टर और सामाजिक अंकेक्षण पुस्तिका प्रिंट करवाई जानी थी। बाकायदा जिला पंचायत से पूरी कागजी प्रक्रिया की गई। जावक रजिस्टर में उसकी एंट्री भी हुई यही नहीं, कलेक्टर द्वारा उप नियंत्रक शासकीय मुद्रणालय भोपाल को पत्र जारी किया और जावक रजिस्टर में उसकी एंट्री भी हुई। ताकि किसी को शक न हो। जबकि यह आदेश शासकीय मुद्रणालय तक नहीं पहुंचा। इसे सीधे राहुल प्रिंटर्स को थमा दिया और उन्हीं से सारे दस्तावेज प्रिंट भी करवा लिए गए। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि भुगतान के लिए राहुल प्रिंटर्स के संचालक ने शासकीय मुद्रणालय भोपाल के दो उप नियंत्रक एके खंडूरी और देवदत्त से सांठगांठ कर रखी थी। इससे उन्होंने राहुल प्रिंटर्स द्वारा प्रस्तुत बिल का परीक्षण व सत्यापन कर उसे पास कर दिया। इसके बाद बिल जिला पंचायत में लगा दिए। यहां से बिल का भुगतान भी कर दिया गया।
इस तरह लगाया शासन को चूना
1. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में नंदन फलोद्यान के लिए 1500 एक्जिट प्रोटोकॉल रजिस्टर प्रिंट कराने का कार्य यदि यह कार्य शासकीय मुद्रणायलय से करवाया जाता तो महज 1 लाख 44 हजार 720 रुपए का खर्च आता। इसी कार्य के लिए राहुल प्रिंटर्स के मुकेश शर्मा को 6 लाख 60 हजार 660 का भुगतान किया गया। यानी सीधे तौर पर शासन को 5 लाख 15 हजार 934 रुपए का चूना लगाया।
2. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लिए एक्जिट प्रोटोकॉल संधारण के लिए 1440 रजिस्टर भी राहुल प्रिंटर्स से ही प्रिंट करवाए गए। शासकीय मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग भोपाल द्वारा तय की गई दरों के अनुसार यह कार्य 2 लाख 21 हजार 16 रुपए में हो सकता था। जबकि इसके लिए राहुल प्रिंटर्स को 9 लाख 88 हजार 416 रुपए का भुगतान किया। यानी 7 लाख 67 हजार 400 रुपए का अतिरिक्त भुगतान कर राहुल प्रिंटर्स को आर्थिक लाभ पहुंचाया गया।
3. समग्र स्वच्छता अभियान के अंतर्गत प्रचार प्रसार के लिए 20 हजार पोस्टर और पंपलेट प्रिंट करवाने का आदेश भी राहुल प्रिटर्स को ही मिला।शासकीय मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग भोपाल द्वारा तय की गई दरों के अनुसार यह कार्य 1 लाख 49 हजार 181 रुपए में किया जा सकता था। जबकि इसी काम के लिए राहुल प्रिंटर्स को 10.९२लाख का भुगतान किया गया। यह शासकीय दर की तुलना में 9.४२ लाख रुपए ज्यादा है।
4. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में सामाजिक अंकेक्षण पुस्तिका की छपाई बिना निविदा बुलाए महंगी दर पर राहुल प्रिंटर्स से ही करवाई। शासकीय मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग भोपाल द्वारा तय की गई दरों के अनुसार यह कार्य महज 68 हजार 968 रुपए में किया जा सकता था। इसके लिए राहुल प्रिंटर्स को 6 लाख 13 हजार 600 रुपए का भुगतान किया। यह निर्धारित दर से 5 लाख 44 हजार 632 रुपए अधिक है।
Published on:
03 Sept 2023 12:28 am

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