
bhagat singh
ग्वालियर/श्योपुर। देश की आजादी के लिए हंसते हुए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले देश के वीर सपूत क्रांतिकारी सरदार भगत सिंह श्योपुर के कराहल के जंगलों में भी आए। यहां न सिर्फ वह अंग्रेजों से छुपकर कुछ दिन तक रुके रहे बल्कि उन्होंने अपने साथियों संग बैठक कर रणनीतियां भी तैयार की। इस दौरान कराहल के स्वतंत्रता संग्राम सैनानी स्व.रामसेवक पाठक की भी उनसे मुलाकात हुई थी। भले आज इस बात को जिले के अधिकांश लोग न जानते हों। मगर कराहल क्षेत्र के कई ऐसे लोग हैं,जो इस बात की पुष्टि करते हैं। स्वतंत्रता संग्राम सैनानी स्व.पाठक तो बकायदा सरदार भगत सिंह के आने और कराहल के जंगल में रुकने वाले स्थान को पर्यटन और पार्क आदि के स्वरूप में बदले जाने की मांग को लेकर जिला प्रशासन को कई दफा पत्र भी लिख चुके थे।
हालांकि अभी यह स्थान गुमनामी का शिकार है, लेकिन राष्ट्रीय पर्वों के दौरान कराहल के लोगों के बीच इस वीर नायक की गाथाएं चर्चाओं में हैं और लोग आज भी आजादी के इस वीर सपूत के अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने और अपनी रणनीति को बनाने के लिए कराहल के जंगल तक में आ जाने की बातें नौजवान और बच्चों को बड़े ही गर्व के साथ बताते हैं।
क्रंतिकारी दयाशंकर शुक्ला से मिलने आए थे भगत सिंह
स्थानीय लोग बताते हैं कि आजादी के लिए वर्ष 1927-28 में जब आंदोलन चल रहा था,तब कराहल में भी दयाशंकर शुक्ला नाम के एक क्रांतिकारी मौजूद थे।
बताया जाता था है कि अंग्रेजों से छिपने और अपने इस क्रांतिकारी साथी से मिलने के लिए ही सरदार भगत सिंह कराहल आए थे और यहां के जंगल में दो दिन तक रुके रहे थे। इस दौरान उनके साथ तीन लोग और थे,जिनकी यहां कराहल के जंगल में बैठक भी हुई। इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे स्व. पाठक की भी उनसे मुलाकात हुई थी और वह उनके लिए खाना भी भेजते थे।
Published on:
10 Jan 2018, 1:18 PM IST
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