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एसआइआर: पक्ष रखने आए मतदाताओं की कतार टूटी, जिन्हें दुबारा मौका दिया वह वापस नहीं आए

मतदाता सूची के पुनरीक्षण का दूसरा चरण प्रशासन व मतदाताओं के लिए उलझन भरा हो गया है। नो मैपिंग वाले मतदाताओं ने अब आना बंद कर दिया है। इस कारण रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के यहां लगी कतारें टूट गई हैं। सुनवाई के लिए अधिकारी खाली बैठे हैं। जिन्हें दस्तावेज पेश करने के लिए दुबारा मौका दिया […]

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मतदाता सूची के पुनरीक्षण का दूसरा चरण प्रशासन व मतदाताओं के लिए उलझन भरा हो गया है। नो मैपिंग वाले मतदाताओं ने अब आना बंद कर दिया है। इस कारण रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के यहां लगी कतारें टूट गई हैं। सुनवाई के लिए अधिकारी खाली बैठे हैं। जिन्हें दस्तावेज पेश करने के लिए दुबारा मौका दिया था, वापस लौटकर नहीं आए। इसके अलावा लॉजिकल एरर वाले 3 लाख 21 हजार मतदाताओं के नोटिस डाउनलोड करने का काम चल रहा है। ये नोटिस डाउनलोड नहीं हो रहे हैं। इसमें शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी है। शिक्षकों के सामने बोर्ड परीक्षा का भी संकट आ गया है। ऐसी स्थिति में दोनों ही काम प्रभावित हो रहे हैं।

प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने प्रदेश के उप निर्वाचन अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक ली। इस बैठक में निर्वाचन पदाधिकारी को जिलों से समस्याएं बताई, लेकिन इन समस्याओं को दरकिनार कर दिया। अल्टीमेटम दिया कि 14 फरवरी तक नो मैपिंग व लॉजिकल एरर वाले मतदाताओं की सुनवाई खत्म करना है। अब तारीख नहीं बढ़ाने के लिए भी कहा है। लॉजिकल एरर वाले मतदाताओं के 20 हजार नोटिस ही डाउनलोड हुए हैं। 3 लाख मतदाताओं के नोटिस शेष हैं। उप जिला निर्वाचन अधिकारी अनिल बनवारिया का कहना है कि नोटिस डाउनलोड किए जा रहे हैं।

अब तारीख लेने से भी किया इनकार

- सुनवाई के दौरान मतदाता नल, बिजली, रजिस्ट्री, आधार कार्ड, समग्र आइडी पेश कर रहे हैं, लेकिन इन दस्तावेजों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। अब मतदाता कह जा रहे हैं कि यही दस्तावेज मौजूद है। पुराने दस्तावेज नहीं है।

- जो मतदाता दस्तावेज पेश नहीं कर पाएंगे, उनके मत कट जाएंगे। बीएलओ के भी घर-घर भेजा गया, लेकिन दस्तावेज नहीं दिए गए। नो मैपिंग वाले 35 हजार मतदाताओं के नाम कट सकते हैं।

डाउनलोडिंग में यह आ रही है दिक्कत

- आयोग का पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा है। इसके अलावा इंटरनेट भी काम नहीं कर रहा है। इस कारण मोबाइल के नेट पर काम कर रहे हैं।

- एक-एक मतदाता का नोटिस डाउनलोड करना पड़ रहा है। यदि एक साथ 10 सिलेक्टर करके करते हैं तो नोटिस ड्रॉप हो जाता है, जिसे फिर से तलाशना पड़ता है।

- नोटिस बीएलओ के पास नहीं पहुंचे हैं। नोटिस प्रिंट होने के बाद बीएलओ के पास पहुंचेंगे, वितरित होंगे।

- लॉजिकल एरर वाले मतदाताओं को भी अपने दस्तावेज पेश करने होंगे।

- जिले के 3 लाख 21 हजार मतदाताओं को फिर से एसआइआर का सामना करना पड़ेगा।

- इन्फ्रास्ट्रक्चर भी मौजूद नहीं है। कंप्यूटर, ऑपरेटर भी कार्यालय में नहीं है। जबकि सुनवाई 3 लाख 21 हजार लोगों की होनी है।

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