
ग्वालियर. लगातार कम हो रहे शक्कर के दामों ने रसोई में मिठास घोल दी है। पिछले कुछ समय से शक्कर के दाम इस तेजी से लुढ़के हैं कि 10 साल पुराने स्तर पर पहुंच गए हैं। बाजार में शक्कर के थोक दाम 2900 से 3000 रुपए क्विंटल हो गए हैं, वहीं फुटकर में 30 से 31 रुपए प्रति किलो हैं। शक्कर कारोबारियों का कहना है कि उत्पादन अधिक होने से ऐसा हो रहा है। शहर में शक्कर की आवक भी भरपूर बनी हुई है। गर्मी के दिनों में शक्कर की खपत बढ़ जाती है पर इसका असर कुछ खास नहीं है। व्यापारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में दामों में डेढ़ से दो रुपए किलो की और गिरावट आ सकती है।
ऐसे बढ़ा उत्पादन
| 10 साल के दाम |
| वर्ष | दाम |
| 2008 | 2800-2900 |
| 2009 | 3200-3250 |
| 2010 | 4000-4200 |
| 2011 | 3800-3900 |
| 2012 | 3600-3700 |
| 2013 | 3800-3900 |
| 2014 | 4000-4100 |
2015 | 3700-3800 |
| 2016 | 3800-4000 |
| 2017 | 3700-4000 |
| 2018 | 2900-3000 |
(नोट: शक्कर के क्विंटल के यह दाम दाल बाजार में थोक में हैं।)
फुटकर में महंगी: एक ओर थोक और फुटकर बाजार में भाव नीचे हैं, वहीं फुटकर कारोबारी एक किलो शक्कर के 34 से 35 रुपए वसूल रहे हैं।
शक्कर के दाम 10 साल के पुराने स्तर पर हैं। आवक अधिक होने भावों में गिरावट आ रही है। आने वाले दिनों में दो रुपए और देखी जा सकती है।
मनीष बांदिल, सचिव, शक्कर एवं खांडसारी ऐसोसिएशन
फुटकर में 30 से 31 रुपए किलो के भाव शक्कर बेच रहे हैं। दाम कम होने से बिक्री बढ़ी है। गर्मी के दिनों में शक्कर की खपत बढ़ जाती है।
मुन्नालाल गोयल, किराना कारोबारी
एक समय 45 रुपए किलो भाव थे, अब 30 रुपए किलो हो जाने से अधिक शक्कर खरीदी जा रही है। भाव इतने ही रहने चाहिए।
मीना माहेश्वरी, निवासी लोहामंडी
आधार से निजता को खतरा नहीं: बिल गेट्स
वॉशिंगटन. माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स आधार से इतने प्रभावित हैं को वह इस दूसरे देशों में लागू कराना चाहते हैं और इसके लिए पैसा भी दे रहे हैं। आधार तकनीक में गोपनीयता की समस्या को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने इसे दूसरे देशों में ले जाने को लेकर विश्वबैंक को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराया है क्योंकि यह एक बेहतर चीज है। 62 साल के अरबपति उद्यमी और परमार्थ कार्य में लगे गेट्स ने कहा कि इन्फोसिस के संस्थापक नंदन नीलेकणी इस परियोजना पर विश्वबैंक को परामर्श और मदद कर रहे हैं।
नीलेकणी को आधार का ढांचा तैयार करने के लिए जाना जाता है। गेट्स ने कहा, उसका (आधार-पहचान) का लाभ काफी ज्यादा है। यह दुनिया की सबसे बड़ी बायॉमेट्रिक आइडी प्रणाली है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, देशों को इसे अपनाना चाहिए क्योंकि राजकाज की गुणवत्ता काफी महत्वपूर्ण है।
Published on:
04 May 2018 11:11 am
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