एक माह में 409 की जांच 216 जनें डेगूं के शिकार
अब प्रतिदिन पांच रोगियों की रिपोर्ट आ रही पॉजिटिव
हनुमानगढ़. जिले में एक माह में 216 जनें डेंगू के शिकार हुए हैं। ये वो आंकड़ा जो चिकित्सा विभाग की फाइलों में दर्ज हो चुका है। प्राइवेट अस्पतालों के आंकड़ों को शामिल किया जाए तो यह आंकड़े एक हजार के करीब हो सकते हैं। लेकिन चिकित्सक एवं स्वास्थ्य विभाग एलाइजा की रिपोट पॉजटिव आने पर रोगी को डेंगू की पुष्टि करता है। यह सुविधा प्राइवेट अस्पतालों में नहीं है। इन अस्पतालों में केवल कार्ड टेस्ट के जरिए जांच की जाती है। जिला अस्पताल की लैब के आंकड़ों की मुताबिक 18 अगस्त से लेकर 18 सितंबर तक 409 रोगियों के एलाइजा की जांच की गई। इसमें से 216 जनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है। जानकारी के अनुसार डेंगू बुखार तीन तरह का होता है। पहला साधारण डेंगू बुखार, दूसरा डेंगू हैमरेजिक बुखार (डीएचएफ), डेंगू शॉक सिंड्रोम (डीएसएस)। इन तीनों में से दूसरे और तीसरे तरह का डेंगू सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। साधारण डेंगू बुखार अपने आप ठीक हो जाता है और इससे जान जाने का खतरा नहीं होता लेकिन अगर किसी को डीएचएफ या डीएसएस है और उसका फौरन इलाज लेना चाहिए। कब कितनों की जांच, कितने पॉजिटिव जिला अस्पताल की लैब में 18 अगस्त को 6 जनों की एलाइजा की जांच की गई। इन सभी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 19 अगस्त को 28 सैंपल में से 26 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 21 अगस्त को 35 सैंपल में से 26 जनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। 23 अगस्त को 36 सैंपल में से 22 की रिपोर्ट पॉजिटिव थी। 26 अगस्त को 26 में से 12 की रिपोर्ट पॉजिटिव थी। 28 अगस्त को 19 जनों की रिपोर्ट पॉजिटिव व 29 अगस्त को 18 जनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। सितंबर में यह आंकड़े धीरे-धीरे कम होने लगे। 2 सितंबर को 58 सैंपल में 32 की रिपोर्ट पॉजिटिव, 3 सितंबर को 38 में से 18 जनों की रिपोर्ट पॉजिटिव, 5 सितंबर को 17 में से 13 जनों की रिपोर्ट पॉजिटिव, 6 सितंबर को 39 में 17 जनों को डेंगू के होने की पुष्टि हुई। 7 सितंबर को 19 में से 6 जनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, 9 सितंबर को 36 में से 4 व 13 सितंबर को 19 में से 5 जनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। डेंगू के लक्षण साधारण डेंगू बुखार में ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ता है। सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और बढ़ जाता है। इसके अलावा बहुत ज्यादा कमजोरी लगना, भूख न लगना, शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रैशेज होना। बुखार करीब 5 से 7 दिन तक रहता है और मरीज ठीक हो जाता है। ज्यादातर मामलों में इसी किस्म का डेंगू बुखार होता है। डेंगू हैमरेजिक बुखार होने पर नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उलटी में खून आना. स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के छोटे या बड़े चिकत्ते पड़ जाते हैं। डेंगू शॉक सिंड्रोम होने पर मरीज बहुत बेचैन हो जाता है और तेज बुखार के बावजूद उसकी स्किन ठंडी महसूस होती है। मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है। मरीज की नाड़ी कभी तेज और कभी धीरे चलने लगती है। उसका ब्लड प्रेशर एकदम लो हो जाता है। गली व मोहल्लों में करवाएं फोगिंग घर या ऑफिस के आसपास पानी जमा न होने दें, गड्ढ़ों को मिट्टी से भर दें, रुकी हुई नालियों को साफ करवाएं और स्थानीय पार्षद व सरपंच को कहकर इलाके में फोगिंग करवाएं और एमएलओ दवा का छिड़काव भी करवाएं। अगर पानी जमा होने से रोकना मुमकिन नहीं है तो उसमें पेट्रोल या केरोसिन ऑयल डालें। रूम कूलर, फूलदानों का सारा पानी हफ्ते में एक बार और पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह से खाली करें, उन्हें सुखाएं और फिर भरें। डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें। घर की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाकर मच्छरों को घर में आने से रोकें। मच्छरों को भगाने और मारने के लिए मच्छरनाशक क्रीम, स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि का इस्तेमाल करें। ***********************************************************