सावन की बरसात से गलियों में पानी जमा होने से लोगों को परेशानी हनुमानगढ़ जिले के गांव खुइंया में 54 एमएम बारिश और जिला मुख्यालय पर 13.5 एमएम बरसे बादल
हनुमानगढ़. जिले में मंगलवार को गांव व शहरों में मेघ मेहरबान रहे। इससे कुछ जगह जल भराव की स्थिति बन गई। हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर 13.5, डबलीराठान 08, पीलीबंगा 15, गोलूवाला 12, खुइंया में 54 एमएम बारिश हुई। बाकी जगह हल्की बारिश के समाचार हैं। बरसात से लोगों को गर्मी से राहत मिली। उमस ने परेशान किया। टाउन में वार्ड नंबर 23 के पंजाबी मोहल्ले में गलियों में पानी जमा होने पर लोगों को परेशानी हुई। मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि मामूली बारिश होने पर भी गलियां जलमग्न हो रही है। पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से परेशानी हो रही है। इसी तरह जंक्शन में कलक्ट्रेट मार्ग स्थित परशुराम सर्किल पर सडक़ पर पानी जमा हो गया। देर शाम तक जल भराव की स्थिति रही।
बरसात से जीडीसी के पटड़े में लगे कटावों ने छुड़ाया पसीना
जाखड़ांवाली. निकटवर्ती ग्राम भैरूसरी के पास से गुजर रही जीडीसी में बह रहा बरसाती पानी क्षेत्र के लोगों के लिए गलफांस बना हुआ है। वहीं मंगलवार सुबह दस बजे हुई भारी बरसात से जीडीसी के पटड़ों में जगह-जगह कटाव लगने से मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बरसात में भी कटावों को पाटना शुरू कर दिया। अधिकाधिक संख्या में अपने-अपने संसाधन लेकर पहुंचने की अपील की गई। आसपास के गांव भैरूसरी, मोधूनगर, जाखड़ांवाली सहित दर्जन भर गांवों से सैंकड़ो की तादाद में ग्रामीण मौके पर पहुंचे तथा कटावों को दुरूस्त करवाने में प्रशासन का सहयोग किया। प्रशासन क ओर से लगाई गई मशीनों की मदद से कटावों को भरकर निगरानी की जा रही है। ग्रामीणों ने कटावों के पास मिट्टी से भरे थैले लगाकर बचाव किया। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग द्वारा समय रहते जीडीसी के अन्दर व पटड़ों को मजबूत करने का कार्य नहीं किया गया जिससे पानी बढऩे के कारण जीडीसी के आसपास के दो दर्जन गांवो पर खतरा मंडरा रहा है। पटड़ा टूटने से हजारों बीघा में खड़ी फसलें बरबाद हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी बंद होने के बाद जीडीसी के पटड़ों को पक्का करना चाहिए ताकि आने वाले समय में इस तरह की मुसीबत का सामना नहीं करना पड़े। पिछले दो दिनों से जीडीसी में पानी कम होने से ग्रामीणों ने राहत महसूस की मगर मंगलवार सुबह हुई बरसात ने एक बार फिर लोगों के पसीने छुड़ा दिए। ग्रामीणों व प्रशासन के अलर्ट होने से पटड़ों पर लगे कटावों को सही कर दिया गया।
जीडीसी के पटड़ों में पड़े घारे, ग्रामीणों की मदद से टला खतरा
रावतसर. जीडीसी में पानी का स्तर कम होने के बाद अधिकारियों व कर्मचारियों ने कुछ राहत की सांस ली। वहीं मंगलवार दोपहर जीडीसी क्षेत्र में आई भंयकर बारिश के बाद जीडीसी के पटड़ों में पड़े घारों से प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। जीडीसी के मुय तटबंध की आरडी 154 व आरडी 149 के पास बारिश के पानी से बड़े-बड़े घारे पड़ गए। बारिश शुरू होने के साथ ही अलर्ट हुए प्रशासन व ग्रामीणों ने पटड़ों पर निगरानी बढ़ा दी। भयंकर बारिश के बाद लगातार रखी जा रही निगरानी के बीच ही घारों से जीडीसी में चल रहे पानी का रिसाव शुरू हो गया। इस पर ग्रामीणों की सजगता से सभी को सूचना की गई। सूचना मिलते ही पूरा प्रशासन व आसपास के ग्रामीण ट्रैक्टर ट्रोलियां, करावा आदि लेकर पहुंचे व एक्सक्वेटर मशीन की मदद से घारों को मशक्कत कर थैले लगाकर पाटा गया। वहीं स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उपखण्ड अधिकारी ने आसपास के गांव कलालावाली ढाणी, खेतावाली ढाणी, भेरूसरी व मोधुनगर के ग्रामीणों को अलर्ट कर दिया। ग्रामीण कस्सी, फावड़ा, ट्रैक्टर लेकर मौके पर पहुंचे व पटड़ों को ठीक कर दिया। उपखण्ड अधिकारी रवि कुमार ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि बारिश के समय में ग्रामीण जीडीसी का विशेष ध्यान रखे तथा प्रशासन का सहयोग करे। इस दौरान तहसीलदार नवीन गर्ग, थाना प्रभारी अरूण चौधरी, वृताधिकारी पूनम चौहान, पीलीबंगा उपखण्ड अधिकारी संजना शर्मा, सीडब्ल्यूसी चेयरमैन जितेन्द्र गोयल, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष कमला अठवाल आदि मौजूद रहे।
जोहड़ों को बिसराना पड़ रहा है भारी
डबलीराठान. मानसून की पहली बरसात से ही कस्बे की बुरी गत बन गई है। मंगलवार सुबह लगभग साढ़े नौ बजे बूंदाबांदी का शुरु हुआ दौर बरसात में बदल गया, जो दो घंटे तक कभी धीमा तो कभी तेज गति से चला। दोपहर एक बजे बाद तक बूंदाबांदी का दौर चलता रहा। उपतहसील कार्यालय में स्थापित वर्षा मापी यंत्र के अनुसार आठ एमएम से अधिक बरसात हुई है। कस्बे के मुख्य मार्गो सहित अन्य स्थानों पर जल भराव की स्थिति बन जाने से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। पानी की निकासी सुचारु नहीं होने पर पानी राजीव चौक, ग्राम पंचायत भवन के समक्ष पसर जाता है जो आगे सीएचसी भवन बनने से धीमी गति से नाले एवं अधिक होने पर सीएचसी के समीप पुरातन जोहड़ एवं अनाज मंडी के समक्ष से फोरलेन मार्ग की तरफ निकलने से राहत मिलती है। शहीद चमकौर सिंह राउमावि में भी गलियों का गंदगी युक्त पानी प्रवेशद्वार से घुस जाने से पूरा परिसर जलमग्न हो गया एवं स्कूल में पेयजल स्टोरेज के लिए निर्मित भूमि गत डिग्गी में घुस जाने का अंदेशा पैदा हो गया है। सबसे बुरे हालात हर बार की तरह जोहड़ के किनारे स्थित वार्ड नम्बर 10 की बन गई है। गलियों में चहुं ओर बरसाती पानी भर जाने पर मौहल्ले के लोग घरों में कैद होकर रह गए। ग्रामीणों का कहना है कि देश आजादी से पूर्व पानी की कमी को देखते हुए बरसाती पानी को सहजने के लिए पूर्वजों द्वारा निर्मित जोहड़ों को बिसारना अब भारी पड़ रहा है। मानसून के दौरान एवं बेमोसमी बरसात के समय कस्बे में स्थिति विकट हो जाती है। कस्बे के पांच मुख्य जोहड़, बढ़ती आबादी एवं विकास के नाम पर अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए हैं। जिसका खामियाजा अब ग्रामीण भुगत रहे हैं। जोहडो़ं में बुरी तरह से पसरी कैली ने भी रहती सहती कसर पूरी कर भराव क्षमता को आधी से भी अधिक कम कर दिया है।