
छह माह की उम्र से दें सेमी सॉलिड डाइट, ठोस आहार देने से बचें
कुपोषित होने के लक्षण
भूख कम लगना, खाने-पीने में रुचि न रखना, बच्चे का थका-थका रहना, कमजोर और सुस्त दिखना, बार-बार बीमार होना, ध्यान कम लगाना, सांस लेने में तकलीफ, गाल और आंखें अंदर की ओर धंस जाते हैं।
ऐसे दूर करें कुपोषण
शुरुआती आहार में केवल मां का दूध देना चाहिए। इसमें सभी पोषक तत्व और इम्युनोग्लोबुलिन (सुरक्षा प्रोटीन) होता है जिससे शिशु की इम्युनिटी बढ़ती और बाहरी संक्रमण से बचाव होता है। शुरू के पहले 15 से 20 दिन तक तो हर 2 घंटे पर फीडिंग कराएं। इसके अलावा यदि शिशु की मांग और है तो इससे ज्यादा भी फीडिंग करा सकती हैं।
छह माह के बाद केवल मां का दूध पर्याप्त नहीं होता है। शिशु के संपूर्ण विकास के लिए मां के दूध के साथ सेमी सॉलिड चीजें भी दें। इसमें देरी करने से उनका विकास प्रभावित हो सकता है। उन्हें दिन में चार बार छोटे-छोटे मील दे सकती हैं। इस उम्र में अधिक ठोस आहार देने से उनमें मोटापा, मधुमेह, उदर रोग, एलर्जी आदि का खतरा बढ़ता है। शुरू में बाहरी फूड से एलर्जी हो सकती है, मॉनीटरिंग करें। कोई बदलाव दिखे तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।
आहार देने का तरीका
शुरू में थोड़ा-थोड़ा खिलाएं। धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं। इस दौरान वह स्वाद से परिचित होता है। नया फूड अपच कर सकता है। कोई भी फूड नियमित न दें। रोज बदलकर दें।
शुरू के दो साल महत्वपूर्ण
जन्म के छह माह से दो साल तक का समय हर शिशु के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसमें शरीर का सबसे तेजी से विकास होता है। उसे वजन के अनुसार पोषण की जरूरत होती है। खाने में मूंग दाल की खिचड़ी, सूप, फ्रेश मौसमी फलों का जूस, दही-केला, दूध-केला दें। डेढ़ साल तक ब्रेस्ट फीडिंग कराएं।
ऐसे होगा एलर्जी से बचाव
बच्चे की एक फूड डायरी बनाएं जिसमें पूरे दिन डाइट में कब और क्या-क्या खाने में दिया। पूरा विवरण लिखें ताकि कोई एलर्जी आदि समस्या हो तो इलाज में आसानी हो। अगर किसी चीज से एलर्जी है तो 4 दिन तक दोबारा न दें। पांचवें दिन दें। यदि फिर समस्या हो रही है तो डॉक्टर को दिखाएं।
Published on:
17 Jan 2020 03:04 pm
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