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Coronavirus: गंगा कोविड-फ्री घोषित, रिसर्च में नहीं दिखी कोरोना वायरस की मौजूदगी

Coronavirus: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने गंगा में कोरोना वायरस के संभावित अंशों की जांच के लिए 7 सप्ताह (15 मई से 3 जुलाई ) तक वाराणसी से सैंपल इकट्ठा किए। टीम ने आरएनए से सभी सैंपल का आरटी-पीसीआर टेस्ट भी किया।
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Deovrat Singh

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Updated: 10 Jul 2021, 9:11 AM IST

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Coronavirus:कुंभ मेले के आयोजन के समय ही कोरोना वायरस की दूसरी लहर अपने पीक पर थी। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए निरंजनी अखाड़े ने 17 अप्रैल को कुंभ समाप्त करने का निर्णय लिया था। कुंभ के दौरान बहुत से लोगों के संक्रमित होने पुष्टि हुई थी। इस दौरान यह भी कहा जा रहा था कि गंगा नदी में भी वायरस फ़ैल गया होगा। लेकिन आपको बता दें कि गंगा नदी में कोरोना वायरस की मौजूदगी के संकेत नहीं मिले हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने रिसर्च के बाद ये दावा किया है। दो महीने तक चली रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों इस निष्कर्ष पर आये हैं कि नदी कोविड- फ्री है। गोमती नदी में सितंबर 2020 और इस वर्ष 21 मई को वायरस पाया गया था।

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गंगा कोरोना-मुक्त
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने गंगा में कोरोना वायरस के संभावित अंशों की जांच के लिए 7 सप्ताह (15 मई से 3 जुलाई ) तक वाराणसी से सैंपल इकट्ठा किए। टीम ने आरएनए से सभी सैंपल का आरटी-पीसीआर टेस्ट भी किया। बीरबल साहनी इंस्टिट्यूट ऑफ पल्रियोसाइंसेज के वैज्ञानिक और इंस्टीट्यूट में कोविड लैब के प्रमुख नीरज राय के हवाले से यह बताया गया, "हैरानी की बात है, गंगा से लिए गए किसी भी सैंपल में वायरल आरएनए के संकेत नहीं मिले। जबकि, गोमती नदी से लिए गए सैंपल में वायरल आरएनए की मौजूदगी देखि गई।

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लगभग 50 दिन चला रिसर्च
वैज्ञानिक गंगा के पानी में कुछ असाधारण गुण को खोजने का प्रयास कर रहे हैं। पिछले महीने आईआईटी, गांधीनगर और जेएनयू के स्कूल ऑफ एन्वायरेन्मेंट साइंस के शोधकर्ताओं ने भी अहमदाबाद में साबरमती नदी से कोरोना वायरस की मौजूदगी की पुष्टि की थी। शोधकर्ताओं के अनुसार यह वायरस प्राकृतिक पानी में लंबे समय तक जीवित रह सकता है।

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अमेरिका की सीडीसी के मुताबिक, कोरोना वायरस के प्राकृतिक स्रोतों जैसे समुद्र, झील, पूल, हॉट टब में पानी से लोगों में फैलने के कोई पुख्ता सबूत नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भी पानी से कोरोना वायरस के फैलने की संभावना को रद्द कर चुका है। महामारी के चरम पर नदियों में शव तैरते मिलते थे और नदी के किनारे शवों के दफनाने की खबर ने भी आमजन को डरा दिया था। अब वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि गंगा कोविड-फ्री है।

Web Title: In the research of scientists, corona virus was not found in Ganga

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।