16 मार्च 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

शाकाहारियों और गुर्दे के मरीजों के लिए खुशखबरी: वैज्ञानिकों ने बनाईं खास सब्जियां

टली के वैज्ञानिकों ने मूली और मटर में आयोडीन और पोटेशियम की मात्रा को अपनी जरूरत के हिसाब से बढ़ाया या घटाया है। यह व्यक्तिगत पोषण के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने चार तरह की सब्जियां उगाईं - मूली, मटर, पालक (एक तरह का हरा साग)। उन्होंने खासतौर पर आयोडीन और पोटेशियम पर ध्यान दिया, क्योंकि ये दो पोषक तत्व स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी हैं। दुनियाभर में करीब 2 अरब लोग आयोडीन की कमी से जूझते हैं।

less than 1 minute read
Google source verification
iodine-potassium-in-radish-.jpg

Italian Scientists Tailor Iodine, Potassium in Radishes, Peas

इटली के वैज्ञानिकों ने मूली और मटर में आयोडीन और पोटेशियम की मात्रा को अपनी जरूरत के हिसाब से बदलने में सफलता हासिल की है. इससे लोगों की खास डाइटरी जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा. वैज्ञानिकों ने मिट्टी रहित खेती पद्धति का इस्तेमाल कर माइक्रोग्रीन उगाए हैं. इसमें मिट्टी की जगह तरल पदार्थ का इस्तेमाल होता है और पौधों को पोषक घोल दिया जाता है.

अभी तक आयोडीन की कमी को दूर करने के लिए टेबल नमक में आयोडीन मिलाया जाता था. इसके अलावा, मछली, दूध और अंडे भी आयोडीन के स्रोत हैं. लेकिन, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रोजाना नमक कम खाने की सलाह दी है. साथ ही, शाकाहारी और लाहारी लोगों की संख्या बढ़ रही है. इसलिए, आयोडीन के नए स्रोतों की जरूरत है.

वैज्ञानिकों ने पौधों को उगाने के लिए खास पोषक घोल तैयार किए. इससे उन्होंने बिना किसी मिलावट के उगाए गए माइक्रोग्रीन से 14 गुना ज्यादा आयोडीन वाले पौधे उगाए. इससे आयोडीन का नया स्रोत मिल गया.

गुर्दे की बीमारी वाले लोगों के लिए पोटेशियम कम करने वाले माइक्रोग्रीन भी उगाए गए. ऐसे मरीजों को कम पोटेशियम लेना होता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि सब्जियों में पोटेशियम ज्यादा होता है. इसलिए, गुर्दे की बीमारी वाले लोगों को कई बार सब्जियां नहीं खाने की सलाह दी जाती है. लेकिन, सब्जियों को पानी में भिगोने या उबालने से पोटेशियम थोड़ा ही कम होता है. इससे जरूरी मिनरल्स और विटामिन भी नष्ट हो सकते हैं. इसीलिए, कम पोटेशियम वाली सब्जियां बहुत फायदेमंद होंगी.

यह अध्ययन दक्षिण इटली के एक असली माइक्रोग्रीन खेत पर किया गया था. इससे पता चलता है कि बड़े पैमाने पर खास जरूरत के हिसाब से माइक्रोग्रीन उगाना संभव है. अब वैज्ञानिक पौधों में खास तरह के तत्व बनाने के लिए उनके जैविक मार्ग को बदलने पर शोध कर रहे हैं.