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कच्ची या पकी हल्दी में कौन है बेस्ट? जानिए कैंसर से लेकर दिल की बीमारियों तक में कितना कारगर है ये हर्ब

Know the right amount and way to eat turmeric: हल्दी खाना खाना सेहत के लिए हमेशा अच्छा माना गया है। लेकिन हल्दी कितनी मात्रा में और कैसे खानी चाहिए,ये नहीं बताया जाता। अगर आपको भी इस बात का संशय है कि कच्ची या पाउडर हल्दी में कौन बेस्ट है, तो चलिए इससे जुड़ी सारी जानकारी आपको दें।
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Ritu Singh

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Updated: 3 Apr 2022, 11:10 AM IST

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हल्दी एंटी-फंगल, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी ऑक्सिडेंट से भरी होती है। भारतीय खाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है, लेकिन क्या हम जितनी और जैसी हल्दी खाते हैं, वह बीमारियों से बचाने में कारगर है? पाउडर की तुलना कच्ची हल्दी खाना क्या ज्यादा सही होता है? यही नहीं, स्किन से लेकर कैंसर और दिल तक की बीमारियों में क्या सच में हल्दी कारगर है? इन सभी सवालों का जवाब आपकेा इस खबर में मिलने वाला है।

स्किन डिजी से लेकर, जोड़ों के दर्द, सूजन, सीने में जलन,अपच से लेकर गंभीर बीमारियों-डाइबिटीज, डिप्रेशन,अलजाइमर तक के इलाज में हल्दी को कारगर माना जाता है।
सबसे पहले जानिए कि कच्ची या पाउडर में कौन सी हल्दी है बेस्ट
कच्ची हल्दी और पाउडर हल्दी में कच्ची हल्दी बेस्ट है। इसके पीछे एक नहीं कई कारण हैं। पहला, पाउडर की तुलना में कच्ची हल्दी अधिक सुरक्षित इसलिए होती है कि इससे एलर्जी का खतरा नहीं होता। मार्केट में मिलने वाले हल्दी की शुद्धता पर हमेशा संशय होता है। दूसरा, कच्ची हल्दी अपने प्योरेस्ट फार्म में होती है, जबकि पाडर या सूखी हल्दी उबालने के बाद प्रॉसेस की जाती है। कच्ची हल्दी में सारे ही पोषक तत्व भरपूर होते हैं, जबकि उबालने के बाद हल्दी के कई पोषक तत्व खत्म या कम हो जाते हैं।
कैंसर के लिए क्या उपयोगी है हल्दी
न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के शोध में पाया गया कि हल्दी में दो-तीन फीसदी करक्यूमिन होता है, जो कैंसर से लड़ने में मददगार होता है। रिसर्च में पाया गया कि कैंसर ही नहीं, अस्थमा, एग्जिमा और चिंता तक में ये बहुत कारगर पाई गई। हालांकि, अभी ये प्राथमिक जांच है, अभी और रिसर्च चल रही है। हल्दी खाने वालों के जिन में बदलाव शोध की सकारात्मक पहल है।
दिल की बीमारी में हल्दी कितनी कारगर
'अमेरिकन जनरल ऑफ कार्डियोलॉजी' में छपे इस शोध के के अनुसार दिल की मरीजों में खास कर जिनके दिल का ऑपरेशन हुआ था उन्हें सर्जरी के तीन-चार दिन पहले से रोज दिन में चार बार एक ग्राम हल्दी की कैप्सूल दी गई थी। हल्दी का कैप्सूल लेने वालों में दिल का दौरा पड़ने की आशंका 13 प्रतिशत ही थी। टीम के प्रमुख डॉक्टर वारवारंग वांगचेरोन का कहना है कि हल्दी से बने कैप्सूल लेने वालों में दिल के दौरे का खतरा 65 फीसदी कम पाया गया।

कितनी मात्रा में खाएं रोज हल्दी

हल्दी अगर आप किसी बीमारी के इलाज के लिए खा रहे तो कम से कम रोजाना चार से पांच ग्राम आपको इसे खाना चाहिए। आप चाहें तो हल्दी का सप्लीमेंट भी ले सकते हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सभी जानकारियां सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गई हैं। इनमें से किसी भी सलाह पर अमल करने या किसी तरीके को अपनाने का फैसला आपका व्यक्तिगत निर्णय होगा। किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले कृपया किसी विशेषज्ञ से परामर्श जरूर करें।)

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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