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तवा नहरों से पानी लिफ्ट करने 211 करोड़ होंगे खर्च, 50 गांव के 18 हजार हेक्टेयर में सिंचाई

परियोजना निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार, मंजूरी के लिए शासन को भेजे जाएंगे जल्द  

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Canals of Tawa Dam damaged, large parts of cement washed away from place to place, water will be given from these damaged canals

Canals of Tawa Dam damaged, large parts of cement washed away from place to place, water will be given from these damaged canals

होशंगाबाद

तवा और पिपरिया मुख्य नहर से पानी लिफ्ट करके माइक्रो सिंचाई पद्धति से ५० गांव के १७ हजार ९४२ हेक्टेयर में फसलों को पानी दिया जाएगा। परियोजना पर करीब २११ करोड़ रुपए खर्च होंगे। निर्माण के लिए प्रस्ताव बना लिया गया है। जिसे जल्द ही स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा। परियोजना के मुताबिक पिपरिया नहर से पानी लिफ्ट करके १८ गांव और तवा बांयी नहर पर जुझारपुर व बानापुरा के झाड़बीड़ा में लिफ्ट सिंचाई सिस्टम लगाने से ३२ गांव को सिंचाई के लिए नहरों से पानी दिया जा सकेगा। खास बात यह भी है कि इन सभी गांव में अब तक नहरों से सिंचाई नहीं होती है। किसान फसल लेने के लिए ट्यूबवेल व अन्य निजी साधनों से सिंचाई करते हैं।

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परियोजनाओं पर खर्च होंगे २११ करोड़- तवा परियोजना सोहागपुर के कार्यपालन यंत्री राजाराम मीना ने बताया कि लिफ्ट और माइक्रो परियोजना पर करीब ४९ करोड़ रुपए खर्च होंगे। तवा इटारसी के कार्यपालन यंत्री आईडी कुमरे बताते हैं इटारसी तहसील के जुझारपुर और बानापुरा तहसील के झाड़बीड़ा में परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। जिन पर लगभग १६२ करोड़ रुपए खर्च होंगे।

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२८ से नहर में छोड़ेंगे पानी- होशंगाबाद और हरदा जिले में २ लाख ६१ हजार ५३१ हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की जाएगी। इसके लिए २८ अक्टूबर से बांयी मुख्य नहर में तवा बांध से पानी छोड़ा जाएगा। तवा परियोजना में पिछले वर्ष १४७३ घनमीटर की तुलना में इस वर्ष १९४४ घनमीटर पानी उपलब्ध है। इसलिए रबी में सिंचाई के लिए तवा बांयी तट नहर के किसानों को एक पलेवा तीन पानी और दांयी मुख्य नहर के कृषकों को एक पलेवा तीन पानी दिया जाएगा।

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दो जिले में सिंचाई के लिए पानी- 1974 में 172 करोड़ रुपए में बांध बनाया गया। 58 मीटर ऊंचाई और 1815 मीटर लंबे बांध की क्षमता 1993 मिलियन घनमीटर है। 1978 में तवा बांध से नहरें जोड़ी गई। जिससे हरदा और होशंगाबाद जिले के ढाई से तीन लाख हेक्टेयर में सिंचाई की जाती है।

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इनका कहना है...

लिफ्ट और माइक्रो सिंचाई परियोजनाओं का प्रस्ताव बनाया गया है। इससे नहर का पानी जिन गांव में नहीं पहुंच पाता था, वहां सिंचाई की जाएगी। किसान लाभांवित होंगे।

-आरके मिश्रा, कमिश्नर।

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