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एक देवी ऐसी जिन्हें लगता है जूठन का भोग

23वें वर्ष में पार्वती के अवतार मातंगी देवी की होगी स्थापना, संस्था संकल्प द्वारा शांति नगर में स्थापित की जाएगी मां दुर्गा के अनोखे रूप में प्रतिमा

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एक देवी ऐसी जिन्हें लगता है जूठन का भोग

एक देवी ऐसी जिन्हें लगता है जूठन का भोग

होशंगाबाद. संस्था संकल्प द्वारा स्थापना के 23वें वर्ष में माता पार्वती के अवतार मातंगी देवी की स्थापना की जाएगी। संस्था द्वारा शांति नगर में नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की प्रतिमाएं स्थापित की जाती है। इस बार दक्षिण भारत की देवी मां मातंगी की स्थापना की जाएगी। राजधानी में कलकत्ता से आए कलाकारों द्वारा गंगा के कछार से लाई गई मिट्टी से प्रतिमा तैयार की गई है। मान्यता के अनुसार मातंगी ही ऐसा अवतार है जिन्हें जूठन का भोग लगाया जाता है। समिति सदस्य प्रवीण यादव ने बताया कि इस बार सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त पांडाल तैयार किया जा रहा है। साथ ही उत्सव में अन्य श्रद्धालुओं द्वारा किए गए प्लास्टिक के कचरे का तुरंत ही निपटारा किया जाएगा।
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कौन है माता मातंगी
मतंग शिव का नाम है इनकी शक्ति ही मातंगी है। यह श्याम वर्ण और चन्द्रमा को मस्तक पर धारण करती हैं। यह पूर्णत: वाग्देवी की ही पूर्ति हैं। इनकी चार भुजाओं में चार वेद हैं। मां मातंगी वैदिकों की सरस्वती हैं। पलास और मल्लिका पुष्पों से युक्त बेलपत्रों की पूजा करने से व्यक्ति के अंदर आकर्षण और स्तम्भन शक्ति का विकास होता है। ऐसा व्यक्ति जो मातंगी महाविद्या की सिद्धि प्राप्त करता है अपने क्रीड़ा कौशल से या कला संगीत से दुनिया को अपने वश में कर लेता है। वशीकरण में भी यह महाविद्या कारगर होती है। हिन्दू धर्म के अनुसार मातंगी ही एक ऐसी देवी है जिन्हें जूठन का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि जब माता पार्वती को चंडालिया द्वारा अपनी झूठन का भोग लगाया तब सभी देवगण और भगवान शंकर के भूतादिकगण इसका विरोध करने लग गए लेकिन माता पार्वती ने चंडालिया की श्रद्धा को देख कर मातंगी का रूप लेकर उनके द्वारा चढ़ाए गए जूठन को ग्रहण किया ।
ये होंगे आयोजन
29 सितंबर घट स्थापन
30 सितंबर महारूद्राभिषेक
01 अक्टूबर सुंदरकांड एवं हनुमान चालीसा
02 अक्टूबर बच्चों की स्पर्धाएं
03 अक्टूबर सांई पालकी यात्रा
04 अक्टूबर सांस्कृतिक गरबा
05 अक्टूबर सांस्कृतिक कार्यक्रम
06 अक्टूबर महाआरती, कन्या पूजन, शस्त्र पूजन
07 अक्टूबर हवन व भंडारा
08 अक्टूबर शोभायात्रा व विसर्जन

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