पूर्व कांग्रेस विधायक ने कहा-सस्ती वाहवाही लूटने गरीबों को बांटे केमिकल युक्त जूत-चप्पल
बैतूल। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं। सभी राजनीतिक दल इसकी तैयारी में जुट गए हैं। इस बार कांग्रेस ने गांव-गांव जाने की तैयारी की है। वह भी प्रदेश सरकार द्बारा तेंदूपत्ता संग्राहकों को बांटे गए जूते-चप्पल के मामले में। दरअसल प्रदेश सरकार द्वारा तेंदू पत्ता संग्राहकों को बांटे गए जूते-चप्पलों में कैंसर युक्त केमिकल के होने की खबर सामने आने के बाद जहां आदिवासी संगठनों द्वारा इसका विरोध किया गया। वहीं अब कांग्रेस के पूर्व विधायक धरमूसिंह सिरसाम ने भी बांटे गए जूते-चप्पलों को वापस लेने के लिए विभाग पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि वन विभाग जूते-चप्पल तेंदूपत्ता संग्रहकों से वापस नहीं लेता है तो कांग्रेस पार्टी गांव-गांव जाकर इन जूते-चप्पलों की हकीकत से उन्हें अवगत कराएगी। ताकि आदिवासी कैंसर जैसी बीमारी के शिकार होने से बच सके। पूर्व विधायक सिरसाम ने बताया कि लघु वनोपज संग्राहकों को प्रदेश सरकार ने सस्ती वाहवाही लूटने एवं खरीदी में लूट मचाए जाने के उद्देश्य से जूते-चप्पल बांटने का कार्य किया है। जिसका केमिकल टेस्ट बाद में कराएजाने पर जूते-चप्पलों में ऐसा रसायन लगा होना पाया गया जिससे कैंसर होने का खतरा होता है। राज्य सरकार रसायन के उपयोग कर बनाए गए जूते-चप्पलों को वापस लिए जाने की बजाए पूरे मामले को दबाने का प्रयास कर रही है ताकि खरीदी गई लूट से परदा न उठ पाए।
सीसीएफ का कहना जूते-चप्पल में कोई रसायन नहीं
इधर मुख्य वन संरक्षक पीएस चंपावत ने बताया कि इस वर्ष तेन्दूपत्ता संग्राहकों को मुख्यमंत्री चरण पादुका योजना के तहत जूता-चप्पल, साड़ी एवं पानी की बॉटल का वितरण किया गया है। कुछ लोगों द्वारा यह अफवाह फैलाई जा रही है कि इन जूता-चप्पल में कैंसर जैसी बीमारी पैदा करने वाले रसायन डाले गए हैं। यह सर्वथा असत्य है। सीसीएफ चपावत ने स्पष्ट किया है कि जूता-चप्पल वितरित करने के पूर्व भारत सरकार के प्रतिष्ठित संस्थानों, केन्द्रीय चर्म अनुसंधान संस्था से प्री-डिलीवरी टेस्ट एवं फुटवेयर डिजाइन एण्ड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट नोएडा से पोस्ट डिलीवरी टेस्ट करवाए गए हैं। सभी मानकों पर सफल पाए जाने के उपरांत ही जूता-चप्पल का वितरण किया गया है। वितरित जूता-चप्पल में कोई हानिकारक रसायन नहीं पाए गए है।