मजदूर मां बिलखते हुए बोली- उसी से थीं उम्मीदें, वे भी छिन गईं..

बुझ गए चार घर के चिराग, रात में मनाया जन्मदिन और सुबह दोस्तों के साथ छोड़ गया आदर्श

होशंगाबाद/इटारसी/ रविवार की रात को आदर्श हरदुआ उर्फ अक्कू खुश था। वह बहुत दिनों बाद अपने घर में दोस्तों के साथ जन्मदिन मना रहा था, तब किसी को क्या पता था यह उसकी आखिरी खुशी होगी। इस हादसे ने अक्कू के साथ ही चार घरों के चिराग बुझा दिए। उसकी मजदूर मां का विलाप थम नहीं रहा है, वह बार-बार यह कहते हुए बिलख उठती है कि एक उसी से तो आस थी, वह भी छिन गई। आदर्श की मां घरों में वर्तन साफ कर और पिता मजदूरी कर परिवार पाल रहे थे। लेकिन जैसे ही उसका हॉकी खिलाड़ी के रूप में चयन हुआ तो उन्हें लगा था कि जल्द ही परिवार के दिन फिर जाएंगे। लेकिन सोमवार को हुए हादसे ने न केवल उनसे खुशियां छीन ली बल्कि जिंदगी भर का गम दे दिया।

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यहां बना गमगीन माहौल
नाला मोहल्ला में हादसे की खबर के बाद से गमगीन माहौल है। जब आदर्श को अंतिम विदाई दी गई सारे हॉकी खिलाड़ी मौजूद थे। उन्होंने अपनी-अपनी हॉकी उठाकर साथी को अंतिम विदा किया। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार से निकले आदर्श ने अपनी मेहनत से राष्ट्रीय खिलाड़ी तक का सफर तय किया था। उससे परिवार और मोहल्ले को ही नहीं पूरे जिले को उम्मीदें थी। वह पांच साल पहले एमपी अकादमी में ट्रॉयल देने गया तो उसने देश भर से आए खिलाडिय़ों को पीछे छोड़कर अपनी जगह बनाई थी। पिछले पांच साल से वह अकादमी से खेल रहा था।

पूर्व ओलंपियन अशोक ध्यानचंद बोले-अद्भुत प्रतिभा थी सभी खिलाडिय़ों में

यह पहुंचे अंतिम यात्रा में

उसकी अंतिम यात्रा में खेल एवं युवक कल्याण विभाग संचालक एसएल थाउसेन, कलेक्टर शीलेंद्र सिंह, एसपी एमएल छारी, एसडीएम हरेंद्र नारायण, तहसीलदार तृप्ति पटैरिया सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। आदर्श को उसके छोटे भाई १२ वर्षीय हेमंत ने मुखाग्नि दी। जिला प्रशासन ने तत्काल परिवार को 25 हजार रुपए की मदद दी।

घर का इकलौता और हॉकी का होनहार खिलाड़ी था आदर्श

बुजुर्ग पिता की उम्मीद तोड़ गया शाहनवाज
22 दिन पहले ही शाहनवाज के घर में खुशहाली आई थी जब उसका प्रदेश एकेडमी में चयन हुआ था। तब से वह भोपाल ही रह रहा था। बुजुर्ग पिता हमीद खान भी हॉकी खिलाड़ी रहे हैं। ट्रेनिंग सेंटर के सचिव किशोर शुक्ला ने बताया कि चयन के बाद से घर में खुशी छाई हुई थी। पिता हमीद खान का सपना था की बेटा हॉकी का देश ही नहीं दुनिया में नाम रोशन करे। लेकिन शाहनवाज की मौत की खबर लगते ही वे टूट गए। शनिवार रात ही फोन पर बात हुई थी। उसके बाद सोमवार को उसकी मौत की खबर आ गई। उनका बुढ़ापे का सहारा छिन गया है। उसके परिवार की भी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।

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मैं आज 18 वें साल में प्रवेश कर रहा हूं, सर

मेजर ध्यानचंद्र के बेटे और पूर्व ओलंपियन और भारतीय टीम के पूर्व कप्तान अशोक ध्यानचंद ने कहा कि उनकी आदर्श से बात हुई थी तो उसने कहा था- सर, मैं आज 17 साल पूरे कर 18वें साल में प्रवेश कर गया हूं। लेकिन जन्मदिन की अगली सुबह ही उसका दुखद निधन हो गया। सभी खिलाडिय़ों में अद्भुत प्रतिभा दी। मैं इनके हौसले को बढ़ाने के लिए मैच देखने आया था। इनके अंदर भविष्य के टीम इंडिया के खिलाड़ी देखे थे, लेकिन अब यह एक सपना ही रह गया। यह खिलाड़ी देश की टीम में खेलने के योग्य बनते, लेकिन काल ने हमसे प्रतिभावान खिलाड़ी छीन लिए हैं।

भगवान मैंने क्या बिगाड़ा, जो मेरा बेटा छीना ...
मूलत: ग्वालियर का रहने वाला मृतक अनिकेत भाई-बहन में छोटा था। पिता आरके वरुण हाइकोर्ट के वकील हैं और मां मीना वरुण मप्र पुलिस में एसआई हैं और उनकी पोस्टिंग अशोक नगर है। पिता बताते हैं कि रात में बेटे से मोबाइल पर बात हुई थी। उसने कहा था कि मोबाइल का बैलेंस खत्म हो गया है। टीम अच्छा खेल रही है। मैंने बैलेंस डलवाया। सुबह उसके फोन से ही सरपंच के भतीजे ने हादसे की खबर दी। उसकी मां मीना का रो-रोकर बुरा हाल है। वह कह रही थीं मेरा बेटा कैसे मुझे छोड़कर चला गया। भगवान मैंने क्या बिगाड़ा था तेरा।

कोच से अनुमति लेकर गए थे। सभी पहलुओं की जांच करेंगे। एसपी से भी बात की जा रही है। आज की घटना को देखते हुए इसमें और सुधार करेंगे।
एसएल थाउसेन, संचालक खेल

प्रदेश में पहली बार स्पोट्र्स में इतनी बड़ी घटना हुई है। मृतक के परिवारों को दो-दो लाख रुपए की सहायता दी जाएगी। घायलों का इलाज कराएंगे।

जीतू पटवारी, खेल मंत्री

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