
Guru Nanak Jayanti Festival Guru Nanak Gurpurab Guru Granth Sahib
लोकेश तिवारी/होशंगाबाद । सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव का गुरु ग्रंथ साहिब आज भी होशंगाबाद के गुरुद्वारे में सुरक्षित रखे हैं। यह ग्रंथ होशंगाबाद में 1973 में एक परिवार को मिले थे। जिनको लोगों के दर्शनार्थ इन्हें गुरुद्वारे में रखा गया है। 2007 में मप्र सरकार इस ग्रंथ को एतिहासिक घोषित कर चुकी है। बताया जाता है कि 1430 पन्नों का यह ग्रंथ स्वर्ण मिश्रित स्याही से लिखा गया है। गुरुनानक जयंती पर यहां जिले सहित अन्य जगह से सिख समाजजन मत्था टेकने के लिए आते हैं। इस बार गुुरुनानक जयंती 4 नवंबर को मनाई जाएगी। होशंगाबाद के एक गुरुद्वारे में सात दिन रुके थे नानक।
कहा जाता है कि 1300 ईवी में गुरुनानक देव जी धार्मिक यात्रा पर देश भ्रमण के लिए निकले थे, गुरुनानक के साथ उनके बड़े बेटे उदासी भी साथ में थे। तब वह मध्यभारत प्रांत से गुजरते समय होशंगाबाद पहुंचे थे, नगर में गुरुनानक देव सात दिन तक रहे। इस दौरान उन्होंने नगर में धर्म उपदेश भी दिए थे। जिसे उनके शिष्यों द्बारा लिपिबद्ब किया गया था। इस पूरी यात्रा का जिक्र सरदार गुरुबख्श सिंह द्बारा लिखी गई किताब सूरज प्रकाश में पेज नंबर 81 पर मिलता है।
लकड़ी की पेटी में मिले थे परिवार को
इस संबंध में होशंगाबाद के सरदार राजपाल चड्डा बताते हैं कि यह ग्रंथ उनके पिता सरदार जोगेन्द्रर सिंह चड्डा और स्व. कुंदन सिंह चड्डा को वर्ष 13 अप्रेल 1973 में मंगलवारा घाट स्थित एक घर में मिला था। जो एक लकड़ी की पेटी में बंद थे।
लकड़ी की पेटी में मिले थे परिवार को
इस संबंध में होशंगाबाद के सरदार राजपाल चड्डा बताते हैं कि यह ग्रंथ उनके पिता सरदार जोगेन्द्रर सिंह चड्डा और स्व. कुंदन सिंह चड्डा को वर्ष 13 अप्रेल 1973 में मंगलवारा घाट स्थित एक घर में मिला था। जो एक लकड़ी की पेटी में बंद थे।
देशभर में दो ही ग्रंथ हैं स्वर्ण लिखित स्याही के
स्वर्ण मिश्रित स्याही से लिखे हुए देशभर में दो ही ग्रंथ हैं एक कीरतपुर साहब (पंजाब) में और दूसरा होशंगाबाद के गुरुद्बारे में है। हस्तलिखित इस ग्रंथ के अंतिम पेज पर स्वर्ण स्याही बनाने का फार्मूला भी लिखा गया है।
2007 में हुआ था ऐतिहासिक घोषित
मध्यप्रदेश शासन ने वर्ष 2007 में गुरुद्वारे को ऐतिहासिक घोषित कर दिया था। इसमें तत्कालीन गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सचिव ने शासन से गुरु ग्रंथ साहिब के बारे में जानकारी दी। इसके बाद गुरुद्वारे को ऐतिहासिक घोषित किया गया।
Updated on:
03 Nov 2017 05:42 pm
Published on:
02 Nov 2017 10:51 pm
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