
मजिस्टे्रट की भूमिका निभाएंगे राजा शनि, गुरू उनके मंत्री रहेंगे
नर्मदापुरम. हिंदू नववर्ष चैत्र प्रतिपदा शुरू हो गए। इस वर्ष शनिदेव राजा हैं, जो मजिस्टे्रट (न्याय के देवता) की भूमिका निभाएंगे और उनके मंत्री के रूप में गुरु विराजमान रहेंगे। जो अपने राजा को ज्ञान की बातें ही बताएंगे। शनिवार से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं। 9 दिनों तक लोग मां आदिशक्ति की आराधना में लीन रहेंगे।
पीपल-बरगद पौधे लगाने से मिलेगी गृहों से शांति
नर्मदांचल के ज्योतिषार्य पं. सोमेश परसाई ने बताया कि इस बार के नूतन वर्ष में राजा शनि एवं मंत्री गुरु रहेंगे। शनि एडमिनिस्ट्रेशन यानी मजिस्टे्रट की भूूमिका में हैं, जो लोग अच्छे कर्म करेंगे और धर्म से चलेंगे, दया के भाव से चलेंगे उसके लिए ये साल उसके जीवन में सुख-शांति दायक रहेगा। और जो व्यक्ति अधर्म करेगा वह परेशान-चिंतातुर होकर व्यथित होगा। मंत्री गुरू हैं इसके कारण वह ज्ञान की बातें ही अपने राजा को बताएंगे। सुख-शांति समृद्धि के लिए कन्या का पूजन,पीपल-बरगद का पौधा लगाना चाहिए। कन्या पूजन, विप्र पूजन और ग्रो ग्रास से गृहों की शांति होगी।
चैत्र नवरात्र में ऐसे करें पूजन-आराधना
पं. परसाई ने बताया कि घरों में धन-समृद्धि बनी रहे इसके लिए नवरात्रि में चांदी का स्वास्तिक, हाथी, दीपक, कलश, श्रीयंत्र, मुकुट आदि कुछ भी एक चीज देवी के चरणों में रखना चाहिए। नवरात्रि के आखिरी दिन उसे गुलाबी कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या पैसे रखना और तुलसी का पौधा लगाना भी शुभ होता है। नौ दिन तक देवी के नौ स्वरूपों के समक्ष देवी मंत्र का जप करने दरिद्रता भी दूर होती है। मां भगवती का व्रत रखने तथा प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करने का विशेष महत्व है। हर एक मनोकामना पूरी हो जाती है। सभी कष्टों से छुटकारा दिलाता है।
ये रहेंगे आदिशक्ति के पूजन शुभ मुहूर्त
कलश-घट स्थापना के साथ पहले दिन श्री शैलपुत्री स्वरूप का पूजन होगा। नवरात्र में मां शैलपुत्री के अलावा ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री के रूप में दर्शन देंगी। शुभ मुहुर्त सुबह 6.31 से 8.31 एवं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12.18 बजे से दोपहर 1.07 तक रहेगा। प्रतिदिन कन्याओं का विशेष पूजन का भी महत्व है।
खेड़ापति माई मंदिर पर उमड़ेंगे भक्त
शहर के नर्मदा किनारे शनिचरा वार्ड में नर्मदापुरम प्राचीन-एतिहासिक खेड़ापति माई का मंदिर -मढिय़ा है। यहां शनिवार से नौ दिनों तक नवरात्र में भक्तों की भीड़ पूजन-दर्शन के लिए उमड़ेगी। इस देवी मंदिर की खासियत ये है कि वैवाहिक संस्कार सहित अन्य शुभ कार्य मां के पूजन से ही शुरू होते हैं।
ये है मां के मंदिर का इतिहास
खेड़ापति माई मंदिर सालों से शहरवासियों की आस्था का स्थान है। कहते हैं यह शहर का सबसे पुराना मंदिर है। स्थापना के समय यह मंदिर शहर के मुहाने पर था, इस कारण इसका नाम खेड़ापति मंदिर हो गया। मूर्ति स्थापना की कहानी भी रोचक है। माता ने स्वप्न में आकर अपना स्थान बताया था। एक पीपल के झाड़ में मूर्ति होने की बात कही गई थी, अगले दिन सुबह से उक्त स्थान पर खुदाई की गई। इसके बाद आस्था स्वरुप मंदिर बनाकर उसमें मूर्ति स्थापित कर दी गई।
Published on:
02 Apr 2022 12:21 pm
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