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Interview: कोरोना योद्धा हरजीत सिंह की ख्वाहिश- जल्द ठीक होकर करूंगा सेवा, हमले में कटा था हाथ

-12 अप्रैल को पटियाला कर्फ्यू का उल्लंघन करने से रोका तो निहंगों ने हाथ काट दिया था -30 अप्रैल को डीजीपी पंजाब ने पीजीआई चंडीगढ़ से डिस्चार्ज कराया और बेट को नौकरी दी -मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह और पंजाब पुलिस महानिदेशक के प्रति आभार जताया

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harjeet singh asi

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डॉ. भानु प्रताप सिंह/धीरज शर्मा

पटियाला। पंजाब पुलिस के एएसआई हरजीत सिंह की इन दिनों खास चर्चा है। 12 अप्रैल, 2020 को पटियाला में कर्फ्यू का उल्लंघन करने वाले निहंगों को उन्होंने रोका। उनसे मुकाबला करते हुए हाथ कट गया। फिर वे हिम्मत दिखाते हुए कटे हाथ के साथ स्कूटी पर अस्पताल गए। उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। हाथ की प्लास्टिक सर्जरी हुई। उन्हें पंजाब पुलिस महानिदेशक दिनकर गुप्ता ने पीजीआई से स्वंय डिस्चार्ज कराया। साथ ही हरजीत सिंह के बेटे को पंजाब पुलिस ने सिपाही पद पर नियुक्ति का पत्र दिया। इसके अलावा पंजाब पुलिस ने ‘मैं हूं हरजीत’ नाम से अभियान चलाया। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने वीडियो कॉल कर हरजीत के हालचाल लिए थे। हरजीत सिंह जब पीजीआई से अपने घर पहुंचे तो पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया गया। इस तरह बहादुर कोरोना योद्धा के रूप में उनकी ख्याति हुई है। पत्रिका ने एएसआई हरजीत सिंह से लम्बी बातचीत की। वे कहते हैं देशवासियों ने मुझे बहुत अधिक सम्मान दिया है। करोना वायरस महामारी के इस मिशन में जो भी योद्धा सड़क पर हैं, लोगों को उनका सम्मान करना चाहिए और उनकी हौसला अफजाई करके इस बीमारी से लड़ने की हिम्मत देनी चाहिए। प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंशः-

पत्रिकाः आपके साथ घटना कैसे हुई, जिसमें हाथ कट गया?

हरजीत सिंहः पटियाला के सब्जी मंडी चौक पर हम नाका लगाकर खड़े थे। अचानक निहंग सिंहों की एक गाड़ी आई और वह नाका पार करके चली गई। जैसे ही हमने उस गाड़ी को घेरा, उसमें से एक निहंग सिंह ने कृपाण से हाथ पर वार कर दिया, जिससे उनका हाथ कट गया। इसके बाद निहंग सिंह मौके से फरार हो गए।

पत्रिकाः आप अपने कटे हुए हाथ को अपने हाथ में उठाकर अस्पताल तक कैसे पहुंच गए?

हरजीत सिंहः वाहेगुरु की मेहर है जो उन्होंने मुझे हिम्मत दी। हाथ कट चुका था, इसलिए सोचा कि सबसे पहले हाथ उठाकर इसकी फर्स्ट एड करवा लेनी चाहिए, उसके बाद जो होगा देखा जाएगा।

पत्रिकाः परिवार वालों को जब इस घटना का पता लगा तो उनकी क्या प्रतिक्रिया थी?

हरजीत सिंहः उन्होंने कहा कि मैंने अपने कर्तव्य के प्रति बहादुरी दिखाई। मेरे परिवार को मुझ पर गर्व है। मेरे परिवार का रिएक्शन उसमें सिर्फ यह था कि मेरा हाथ ठीक हो जाए, इसके अलावा कुछ नहीं चाहिए।

पत्रिकाः डिपार्टमेंट का व्यवहार इलाज के दौरान आपके साथ कैसा रहा?

हरजीत सिंहः महकमे ने मेरा साथ हर कदम पर दिया। सबसे पहले मेरे साथ मेरे डीजीपी दिनकर गुप्ता जी ने बार-बार मेरा हाल जाना। मुझे यह एहसास नहीं होने दिया कि मैं अकेला हूं। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह जी ने भी फोन पर कई बार हाल पूछा।

पत्रिकाः क्या कहना चाहेंगे करोना योद्धाओं के लिए?

हरजीत सिंहः कोरोना योद्धा जिनमें पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी, डॉक्टर, सफाई कर्मचारी और जो भी फ्रंट लाइन पर काम कर रहे हैं, हमें उनका सम्मान करना चाहिए। उनका साथ देना चाहिए, यह हमारी उनके प्रति सच्ची सेवा और उनका सम्मान होगा।

पत्रिकाः वैसे कोरोना बीमारी को लेकर आप क्या सोचते हैं?

हरजीत सिंहः कोरोना भयानक महामारी है। इससे बचने का कोई भी उपाय नहीं है। इस बीमारी से लड़ना ही एकमात्र उपाय है और इससे कैसे लड़ना है, इस पर विचार होना चाहिए तभी हम इस से बच सकेंगे, नहीं तो यह कब अपनी चपेट में ले लेगा, कोई नहीं जानता है।

पत्रिकाः कोरोना योद्धाओं पर हो रहे हमले को लेकर क्या कहना चाहते हैं?

हरजीत सिंहः कोरोना योद्धाओं पर हमला करने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि यह लोग यह नहीं जानते कि हम इन्हीं की सेवा के लिए हैं और इन्हीं के लिए सड़क पर खतरे में काम कर रहे हैं।

पत्रिकाः ड्यूटी पर नहीं हैं इस समय तो क्या सोचते हैं?

हरजीत सिंहः मैं चाहता हूं कि मैं जल्द ठीक हो जाऊं और फिर से एक कोरोना योद्धा बनकर लोगों की सेवा करूं जिससे समाज का उद्धार हो सके।

पत्रिकाः किसी के प्रति शुक्रगुजार हैं क्या?

हरजीत सिंहः मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और डीजीपी दिनकर गुप्ता का तहे दिल से धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मुझे सम्मान दिया। साथ में मेरे बेटे को महकमे में जगह देकर मेरे परिवार को बहुत बड़ा सम्मान दिया है।