इंजीनियर्स का कमाल, 7600 टन की 85 साल पुरानी बिल्डिंग को बिना तोड़े किया शिफ्ट

अधिकतर युवाओं में पहली पसंद इंजीनियर बनने की ही होती है। हम आए दिन इंजीनियर्स के द्वारा किए गए काम के बारे में सुनते रहते है। इंजीनियर्स कई बार ऐसे कमाल कर देते है जिसकी तारीफ दुनियाभर में की जाती है। हाल ही में चीनी इंजीनियर्स ने एक अनोखा काम कर सुर्खियां बटोर रहे है।

By: Shaitan Prajapat

Published: 26 Oct 2020, 12:35 PM IST

अधिकतर युवाओं में पहली पसंद इंजीनियर बनने की ही होती है। हम आए दिन इंजीनियर्स के द्वारा किए गए काम के बारे में सुनते रहते है। इंजीनियर्स कई बार ऐसे कमाल कर देते है जिसकी तारीफ दुनियाभर में की जाती है। हाल ही में चीनी इंजीनियर्स ने एक अनोखा काम कर सुर्खियां बटोर रहे है। इंजीनियरों ने 7600 टन की एक बिल्डिंग को बिना तोड़े एक जगह से दूसरे जगह रख दिया। खबरों के अनुसार, यह घटना शंघाई शहर की है जहां पर एक स्कूल को दूसरी जगह शिफ्ट की गई।

इंजीनियरों ने किया नायाब तकनीक का प्रयोग
चीनी इंजीरियरों ने एक नई मिसाल पेश की है। इंजीरियरों ने साल 1935 में बनाई गई स्कूल को एक स्थान से हटाकर दूसरे स्थान पर रखना एक बड़ी चुनौती थी। इस पूरी प्रक्रिया में चीन के इंजीनियरों ने नायाब तकनीक का इस्तेमाल किया है जो दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक रिपोर्ट के अनुसार, जहां यह स्कूल है, वहां एक नए भवन का निर्माण किया जाएगा। इस ऐतिहासिक इमारत होने के कारण इंजीनियरों ने इसे तोड़ने की बजाय इस जगह शिफ्ट करने के बारे में एक प्लान बनाया और इसमें वे कामयाब भी हो गए।

 

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198 रोबोटिक टूल का इस्तेमाल
चीनी मीडिया के अनुसार, हजारों टन की इस इमारत को खिसकाकर 62 मीटर दूर लेकर गए। इंजीनियरों ने इसके लिए करीब 198 रोबोटिक टूल का प्रयोग किया। खबरों के अनुसार, इस काम को पूरा करने में करीब 18 दिन का समय लगा है। चीनी मीडिया सीसीटीवी न्यूज़ नेटवर्क के अनुसार, 15 अक्टूबर को यह पूरा काम सफलतापूर्वक कर लिया गया।

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2 हजार टन के बौद्ध मंदिर को 30 मीटर खिसकाया
चीनी इंजीनियरों ने इस काम में रोबोअिक लेग्स की मदद ली। हालांकि अभी तक इमारतों को बड़े प्लेटफ़ॉर्म पर ज़्यादा क्षमता वाली रेल या क्रेन से खींचा जाता था। ऐसा नहीं कि इंजीनियरों ने यह काम पहली बार किया है। इससे पहले भी इस प्रकार के काम कर चुके है। साल 2017 में करीब 135 वर्ष पुराने 2 हजार टन के ऐतिहासिक बौद्ध मंदिर को लगभग 30 मीटर खिसकाया गया। इस काम को करने में करीब 15 दिन का समय लगा था।

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