
डिजिटल वॉकी-टॉकी सिस्टम
4.36 करोड़ रुपए की लागत
नई प्रणाली के लागू होने के बाद, अब हर वॉकी-टॉकी को यूनिक आईडी नंबर, प्राइवेट कॉल सुविधा, रिकॉर्डिंग सिस्टम उपलब्ध हो गई है। मास्टर कंट्रोल रूम से अब यह पता लगाया जा सकेगा कि कोई अधिकारी या स्टाफ किस स्थान पर मौजूद है और उसकी तत्काल सहायता कहां भेजनी है। 4.36 करोड़ रुपए की लागत से लगाई गई इस डिजिटल वायरलेस प्रणाली को बेंगलूरु स्थित कम्युनिकेशन एवं लॉजिस्टिक्स कार्यालय की ओर से स्वीकृति मिली है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस नई प्रणाली से आपात स्थितियों में निर्णय लेने की गति तेज होगी, भीड़ प्रबंधन और सीमा क्षेत्रों की निगरानी आसान होगी और अपराध नियंत्रण की क्षमता भी बढ़ेगी।
उन्नत सेंसर कैमरे लगाए
जिले के एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि हाल के दिनों में मुख्य चेकपोस्ट, सीमावर्ती प्रवेश द्वार और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर उन्नत सेंसर कैमरे लगाए गए थे। अब डिजिटल वॉकी-टॉकी प्रणाली के जुडऩे से यह पूरा नेटवर्क और अधिक सक्षम हो गया है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक पुलिसिंग के हर स्तर पर हमारी कार्यकुशलता बढ़ाएगी, चाहे वह पेट्रोलिंग हो, दंगों से निपटना हो, ट्रैफिक नियंत्रण हो या सीमावर्ती निगरानी।
सूचनाओं के आदान-प्रदान में होने वाली देरी खत्म होगी
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल संचार से अब न केवल आवाज साफ सुनाई देगी, बल्कि सूचनाओं के आदान-प्रदान में होने वाली देरी भी लगभग खत्म हो जाएगी। आपात स्थितियों में तेज प्रतिक्रिया पुलिसिंग के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है, और यह तकनीक बीदर पुलिस को उसी दिशा में मजबूत आधार देती है।
प्रणाली का कवरेज बेहतर
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस प्रणाली का कवरेज बेहतर बताया जा रहा है, जिससे अब दूरदराज के गाँवों में भी पुलिस बल बिना किसी रुकावट के संपर्क में रह सकेगा। पुलिस विभाग का कहना है कि आने वाले महीनों में इस डिजिटल नेटवर्क को और भी उन्नत किया जाएगा ताकि इसे प्रदेश के सबसे आधुनिक संचार सिस्टमों की श्रेणी में शामिल किया जा सके।
Published on:
16 Dec 2025 08:59 pm
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