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फुगड़ी यानी न मैदान, न पैसा, न ट्रैनर की जरूरत, फिर भी खेलने वाला फिट

बिना कोई खर्च किए रहना है तंदुरुस्त तो खेलिए फुगड़ी...

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रायपुर@ढालसिंह पारधी. रायपुर में इन दिनों राज्य स्तरीय छत्तीसगढि़यां ओलपिक की धूम हैं। यहां प्रदेशभर से 14 खेलों में संभाग स्तर के सैकड़ों खिलाड़ी यहां अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए आए हैं। इसमें एक खेल फुगड़ी भी है, जो छत्तीसगढ़ का परंपरागत खेल है। इस खेल के लिए साजो सामान, मैदान, भारी-भरकम धन राशि या विशेष किस्म के खिलाडियों की आवश्यकता नहीं पड़ती है, फिर भी इसे खेलने वाला पैर से लेकर सिर तक फिट हो जाता है। इसे कैसे खेलते है इसे वीडियो में देखा जा सकता है। यह हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है। इस खेल में भरपूर मनोरंजन के साथ एक सम्पूर्ण शारीरिक व्यायाम शामिल है।
ऐसे खेलते हैं फुगड़ी
जमीन में उंकड़ू बैठकर तेजी से और एक रिदम के साथ उछलते हुए हाथ व पांव को बारी-बारी से आगे पीछे चलाया जाता है। तेज सांस चलने की वजह से हाथ, पांव, अंगुली, पंजा, घुटना, कोहनी, पेट, पीठ, हड्डी, आँख, फेफड़े जैसे सभी अंगो का व्यायाम हो जाता है। इसका प्रतिदिन अभ्यास करने से से खून की व्याधि, पेट, आंख संबंधी रोग दूर हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ में विशेषकर बच्चियां इसे घर -आंगन में मनोरंजन के साथ खेलती हैं। फुगड़ी सात प्रकार की क्रमश: मांग फुगड़ी, चुंनचुनिया भाजी भुगड़ी, ‍्मेंछा फुगड़ी आदि है, जिनमें अलग-अलग तरह का अभिनय किया जाता है।