
52 फीसदी परिवारों में से किसी एक सदस्य या ज्यादा को हुआ दवाइयों के साइड इफेक्ट का अनुभव
देश में 52 फीसदी परिवार ऐसे हैं, जिनके एक या इससे ज्यादा सदस्यों ने पिछले पांच साल में किसी दवा के साइड इफेक्ट का अनुभव किया। लोकल सर्कल्स के राष्ट्रीय सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है। सर्वेक्षण में देश के 341 जिलों के करीब 22,000 लोग शामिल किए गए। इनमें 68 फीसदी पुरुष और 32 फीसदी महिलाएं शामिल हैं।सर्वेक्षण में 34 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्होंने या परिवार के अन्य सदस्यों ने पिछले पांच साल में एक-दो बार ऐसा अनुभव किया। छह फीसदी को ऐसा अनुभव 10 से ज्यादा बार, तीन फीसदी को 6 से 9 बार, जबकि 9 फीसदी को 3 से 5 बार हुआ। सिर्फ 30 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्हें इस तरह के अनुभव से नहीं गुजरना पड़ा, जबकि 18 फीसदी इस बारे में अनिश्चित थे। सर्वेक्षण में शामिल 85 फीसदी का मानना है कि दवा निर्माताओं के लिए पैकेजिंग पर दुष्प्रभावों का खुलासा करना अनिवार्य होना चाहिए। सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया कि दुष्प्रभावों के बारे में जनता को जागरूक करने की सख्त जरूरत है।
नियामक सक्रिय
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने हाल ही मरीजों और स्वास्थ्य पेशेवरों को एक लोकप्रिय एंटासिड डाइजीन जेल का उपयोग बंद करने की सलाह दी। दवा निर्माता ने इस उत्पाद को स्वैच्छिक रूप से वापस लेने की बात कही है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र संगठन की जांच में एक भारतीय कफ सिरप में डायथिलीन और एथिलीन ग्लाइकॉल का उच्च स्तर पाया गया था।
असुरक्षित दवाओं के कई मामले उजागर
पिछले 12 महीने में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां दवाएं असुरक्षित पाई गईं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने जुलाई में दवाओं के 51 बैच मानक गुणवत्ता के प्रतिकूल पाए थे। इनमें रोसुवास्टेटिन, टैम्सुलोसिन हाइड्रोक्लोराइड और डस्टास्टराइड टैबलेट शामिल थीं।
Published on:
08 Sept 2023 12:44 am
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