दिनेश यदु @ रायपुर. प्री-वेडिंग शूट के चलन को समाजसेवी स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इनका कहना है कि ये हिंदू संस्कृति के अनुरूप नहीं है। यह कुरीति बनकर सामने आ रही है। इवेंट मैनेजमेंट वाले शादियों में कुछ नया करने के चक्कर में गलत चीजें लातेेे हैं। फोटो सार्वजनिक होने से निजता भी खत्म हो रही है। दरअसल, कुछ दिन पहले महिला आयोग में एक युवती ने प्री वेडिंग शूट के बाद शादी टूटने की शिकायत की थी, जिसमें दोनों पक्ष ने आपस में बैठकर फोटो-वीडियो डिलीट कर आपसी समझौता से मामले का निराकरण किया था। इसके बाद यह मामले ने जोर पकड़ लिया है। आप भी जानिए समाज प्रमुखों की इस पर क्या राय है.
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा वीरांगना की राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतू अमित सिंह ने कहा कि प्री वेडिंग शूट को लोग स्टेटस सिंबल मानने लगे हैं। यह हमारी संस्कृति नहीं है। इस चलन से खर्च का अतिरिक्त बोझ आता है। आज के दौर में प्री वेडिंग शूट होने के बाद रिश्ते टूट जाते हैं। इससे युवती की भावनाएं आहत होती है।
साहू भवन कर्माधाम, योग प्रशिक्षिका, अनिता साहू ने कहा कि पश्चात्य संस्कृति से हमारी संस्कृति पुस्तकों और कहानियों में गुम होती जा रही है। शादी में रस्म, रीति-रिवाजों की शूटिंग करनी चाहिए, जिससे आने वाले युवाओं को सभ्यता के बारे में जानकारी मिले। विवाह के बाद वीडियो फोटोग्राफी हो।
सर्वमंगल फाउंडेशन की अनिता दुबे ने कहा कि चंद मुलाकात में युवक- युवती के परिवार एक दूसरे से भलीभांति परिचित नहीं होते हैं। न ही मानसिक रूप से जुड़ पाते हैं। प्री वेडिंग शूट फूहड़ता है। इसकी मान्यता देना अपने पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा है। इस पर रोक लगना चाहिए।