रायपुर. बुधवार को पं. रविशंकर शुक्ल युनिवर्सिटी का 26वां दीक्षांत समारोह मनाया गया। इसमें 136 गोल्ड मेडल वितरित किए गए। पीएचडी की 308 और डीलिट की एक डिग्री प्रदान की गई। गोल्ड मेडलिस्ट की संख्या ज्यादा होने के कारण एक बार में चार-चार युवाओं को मंच पर बुलाया गया। खात बात यह रहीं कि मेडल व डिग्री लेने कोई विदेश से आया तो कोई छोटे बच्चों व फैमिली संग आया। नेत्रहीन देवश्री भोयर ने भी डिग्री ली।
डोंट एब्यूज, डिसयूज, मिसयूज बॉडी एंड माइंड: प्रो. रंजन
मुख्य वक्ता पद्मश्री प्रो. वार्इ.एस. रंजन ने कहा कि महिलाएं सिर्फ गृहलक्ष्मी बनकर न रहें बल्कि बाहर अग्नि की तरह रहें। आपको बहुत कुछ करना है। खुद को साबित करें। उन्होंने सभी से कहा, डोंट एब्यूज, डिसयूज, मिसयूज बॉडी एंड माइंड। एब्यूज,का उदाहरण देते हुए कहा कि युवा खुद पर अत्याचार न करें। इतना प्रेशर न लें कि रात में ढंग से सो ही नहीं पा रहे हों। डिसयूज पर कहा, इतना अलाल भी न बनें कि मम्मी हर चीज लाकर दे। तीसरी चीज मिसयूज पर बोले- बॉडी और माइंड का रॉन्ग यूज न करें। इन्हें फॉलो करेंगे तो भविष्य सुनहरा होगा। राज्यपाल एवं कुलाधिपति विश्वभूषण हरिचंदन ने हिमालय से लेकर कन्या कुमारी तक चलाए गए भारत छोड़ो आंदोलन की चर्चा की। महात्मा गांधी के सत्य अहिंसा सत्याग्रह के प्रयोग की चर्चा के साथ ही सुभाषचंद्र बोस के भारतीय स्वाधीनता में योगदान से युवा पीढ़ी को अवगत होने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गोल्ड मेडल तथा पीएचडी उपाधि लेने वालों में 66त्न महिलाओं के होने की प्रासंगिकता बताते हुए कहा कि नारी अब अबला नहीं सबला है।
एडवोकेट पिता से मिली वकालत की प्रेरणा
राजनांदगांव की रूपाली साव एलएलएम (2021) के लिए गोल्ड मिला। वे इन दिनों महाराष्ट्र ग्रामीण बैंक परघनी में लीगल ऑफिसर हैं। रूपाली ने बताया, पिता विष्णुप्रसाद साव एडवोकेट रहे हैं। मैं उन्हीं से प्रेरित होकर इस फील्ड में आई। एक सवाल के जवाब पर बोलींञ वकील सच को झूठ और झूठ को सच साबित करते हैं, यह गलत धारणा है। वकील न्याय के लिए लड़ते हैं। मैं भी वही करूंगी।
छत्तीसगढ़ी में रोजगार नहीं, सिनेमा लाइन में जाऊंगा
महादेव घाट निवासी समीर ने छत्तीसगढ़ी में एमए किया है। उन्हें दो गोल्ड हासिल हुए हैं। वे कहते हैं, छत्तीसगढ़ी में रोजगार की संभावना कम है इसलिए मैं सिनेमा लाइन में काम करना चाहूंगा। मैंने थिएटर किया है। कुछ हिंदी फिल्म में छोटा-मोटा रोल भी किया है। कला के क्षेत्र में ही कॅरियर बनाना है।
गोल्ड की उम्मीद नहीं थी
धमतरी निवासी रोशनी को एमएससी में दो गोल्ड मिले हैं। वे अभी पीएचडी कर रही हैं। मैंने गोल्ड की उम्मीद तो नहीं की थी लेकिन जो पढ़ाई की वो रंग लाई। पीएचडी के बाद पोस्ट डॉक्टरेट भी करूंगी।
गोल्ड मिलने से बढ़ जाती है जिम्मेदारी
पचपेढ़ी नाका निवासी निकिता ने एमए इकोनॉमिक्स में चार गोल्ड हासिल किया है। मुझे टीचिंग फील्ड में जाना है। गोल्ड मिलने से लोगों की अपेक्षाएं और हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि हम उस विषय में और क्या नया कर सकते हैं। पिता जर्नलिस्ट हैं।
पढ़ाई के दौरान थीं प्रेग्नेंट, 16 माह की बिटिया संग लिया छह गोल्ड
तरणजीत कुकरेजा को बी.फॉर्म और एम. फॉर्म में छह गोल्ड मिले हैं। वे अपनी फैमिली और 16 महीने की बिटिया मेहर के साथ मेडल लेने पहुंचीं थीं। उन्होंने बताया, प्रेग्नेंसी के समय और उसके बाद भी मैंने पढ़ाई जारी रखी। फैमिली सपोर्ट के चलते मैंने वह अचीव कर लिया जो चाहती थी। अभी मैं फॉर्मेसी में पीएचडी कर रही हूं। मुझे ऐसी दवा बनानी है जो पूरी सोसायटी के लिए फायदेमंद हो। मैं मूलत: राजनांदगांव की हूं, ससुराल दुर्ग में है लेकिन रहना रायपुर में होता है। मां ने बताया, 1990 में राजनांदगांव के दिग्विजय कॉलेज से मैंने जूलॉजी में एमएससी किया था। मैं टॉप टेन में थी और रविवि से गोल्ड मेडल मिला था। आज बेटी ने गोल्ड हासिल कर मेरा नाम जिंदा कर दिया।
प्रोफेसर बनने का लक्ष्य
गुरुर जिला बालोद के वीरेंद्र पटेल ने एमएससी बॉटनी में तीन गोल्ड हासिल किए हैं। वे आगे चलकर प्रोफसर बनना चाहते हैं। अभी नेट की तैयारी कर रहे हैं और बीएड कर रहे हैं।
बिटिया संग पहुंची यंजना
यंजना साहू ने साइकोलॉजी में पीएचडी की है। वे बताती हैं, जब मेरा वायवा हुआ था तब मैं डेढ़ महीने की प्रेग्नेंसी थी। कहा जाता है कि जब बच्चा पेट मे रहता है और आप जो भी पढ़ते हैं उसका असर बच्चे पर होता है। आगे चलकर ये भी एजुकेशन में अच्छा नाम कमाएगी।
यूपीएससी क्रैक करना चाहती हैं बरखा
राजधानी के वीरभद्र नगर(न्यू बस स्टैंड) बरखा नाग को पोलिटिकल सांइस में पांच गोल्ड मिले हैं। वे कहती हैं, गोल्ड मिलेगा यह सोचकर कभी पढ़ाई नहीं की। मैंने नेट क्लियर कर लिया है। आगे में जेआरएफ भी क्लियर करना चाहती हूं। यूपीएससी की तैयारी भी कर रही हूं। पिता किराना दुकान चलाते हैं। एक सवाल पर बोलीं- सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव नहीं रहती। यूट्यूब का इस्तेमाल पढ़ाई और गाने सुनने के लिए करती हूं।
पति एलएलएम, पत्नी एलएलबी, बेटा करेगा बीए एलएलबी
48 साल के कृष्ण कुमार ने एलएलएम में गोल्ड हासिल किया है। उन्होंने 1998 में ग्रेजुएशन किया था। 20 साल बाद मास्टर्स किया। उन्होंने बताया, पत्नी ने एलएलबी किया है। बेटा बीए एलएलबी करेगा। मैं प्रोफेसर बनना चाहता हूं। एक वकील मित्र ने कहा है कि जब कभी बुक लिखेंगे तो मेरी फैमिली पर लिखेंगे।
58 की उम्र में एमएड में गोल्ड
राजेंद्र काले रविवि कैंपस स्थित स्कूल में पढ़ाते हैं। वे कहते हैं, अच्छा शिक्षक वहीं होता है जो जीवनभर विद्यार्थी बना रहे। जो स्वयं विद्यार्थी रहता है वह अपने स्टूडेंट्स को भी प्रेरित करता है कि लगातार अध्ययन करते रहें। रेगुलर स्टडी हें सफलता दिलाती है। मेरी बिटिया वैष्णवी काले को भी इस साल एनआईटी रायपुर ने एमटेक में गोल्ड दिया है।
फैमिली में पहली गोल्ड मेडलिस्ट
बलौदाबाजार की केशर को वोकेशनल कोर्स (यूजी) और पर्यावरण विज्ञान (पीजी) में तीन गोल्ड मिले हैं। उन्होंने बताया, आगे चलकर पीएचडी करना चाहती हूं। मैं अपनी फैमिली से फस्र्ट गोल्ड मेडलिस्ट हूं।
पिता पर पीएचडी
हेमचंद्र जांगड़े ने पिता रेशमलाल जांगड़े पर पीएचडी की। स्वतंत्रता सेनानीस्व. जांगड़े चार बार सांसद, तीन बार विधायक थे। उन्हें 1963 में मंत्री पद भी मिला था।
नीदरलैंड से डिग्री लेने पहुंचीं प्रणिता
प्रणिता शर्मा ने माइक्रोबॉयोलॉजी में रिसर्च किया और नीदरलैंड से पीएचडी की डिग्री लेने रायपुर पहुंचीं। इस मौके उनके पति, बच्चा और पूरा परिवार शामिल हुआ।
अंकुर को तीन गोल्ड
महावीर नगर के एमए अंग्रेजी में अंकुर चावला को तीन स्वर्ण पदक प्राप्त हुए। शीतलचंद्र शर्मा को आधुनिक संस्कृत साहित्य के यात्रा वृतांतों का अध्ययन विषय पर पीएचडी हासिल हुई।
शिवानी को 4 गोल्ड
शिवानी तंबोली को 4 गोल्ड मिले हैं। खैरागढ़ यूनिवर्सिटी से कथक में 10 साल की शिक्षा के साथ एमए भी पूरा किया है। कथक की पढ़ाई के साथ साथ कॉलेज की पढ़ाई करते हुए उन्हें गोल्ड मेडल प्राप्त हुए हैं। वे अभी स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय , लालपुर में कंप्यूटर शिक्षक के पद पर पदस्थ हैं।