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बच्चों के लिए लंबे समय तक स्क्रीन देखना खतरनाक, 43 फीसदी की नजरें खराब

अध्ययन: सूरज की रोशनी से कम संपर्क में आना भी प्रमुख कारण

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बच्चों के लिए लंबे समय तक स्क्रीन देखना खतरनाक, 43 फीसदी की नजरें खराब

बच्चों के लिए लंबे समय तक स्क्रीन देखना खतरनाक, 43 फीसदी की नजरें खराब

नई दिल्ली. बच्चों का ज्यादा देर तक स्क्रीन देखना और सूरज की रोशनी में कम रहना उनकी आंखों के लिए खतरनाक होता जा रहा है। इस कारण प्री-स्कूल जाने वाले ढाई से छह साल की उम्र के लगभग 43 फीसदी बच्चों की नजर खराब हो गई है। हाल ही में नई दिल्ली में 1723 बच्चों के किए गए स्क्रीनिंग टेस्ट से पता चला कि हालत इतने खराब हो चुके हैं कि हर पांचवें बच्चों को तुरंत चश्मा लगवाने की जरूरत है।

इस अध्ययन में छोटे बच्चों की दृष्टि खराब होने के तीन प्रमुख कारण बताए गए। इनमें बच्चों का कम बाहर जाकर (आउटडोर गेम्स) खेलना, सूरज की रोशनी से कम संपर्क में आना और बहुत ज्यादा समय के लिए स्क्रीन (टीवी, मोबाइल) देखना शामिल हैं। इस अध्यन में बताया गया कि बच्चों को आउटडोर गतिविधियों को बढ़ाने और पौष्टिक भोजन से इस समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

50 फीसदी आबादी को होगा निकट दृष्टिदोष

बाल नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नुति शाह ने बताया कि 2050 तक 50 प्रतिशत आबादी निकट दृष्टिदोष (माइनस नंबर) से पीडि़त होगी। उन्होंने कहा कि ऐसे में तीन साल की उम्र में बच्चों की आंखों की अनिवार्य जांच करानी चाहिए। इसके बाद हर साल में एक बार जांच कराते रहना चाहिए।

दो घंटे का आउटडोर गेम्स

अध्ययन में बच्चे की आंखों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए सूरज की रोशनी के उचित संपर्क के साथ दो घंटे के आउटडोर गेम्स खेलने चाहिए। इसके लिए स्क्रीन समय सीमित रखना चाहिए।