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राहुल गांधी को धमकी देने वाले का अहम सुराग मिला, लोकेशन भी ट्रेस

इंदौर लेटर बम की Echo Haryana तक पहुंची      

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इंदौर. कांग्रेस नेता राहुल गांधी व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को मारने व इंदौर को बम धमाकों से दहलाने की धमकी वाले पत्र के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पत्र भेजने वाले की पहचान कर ली गई है। हालांकि वह पुलिस के हाथ नहीं लगा। पत्र के साथ अमनदीप निवासी करनाल का वोटर पहचान-पत्र मिला था। पुलिस टीम करनाल में अमनदीप तक पहुंच गई है। डीसीपी जोन 4 राजेशकुमार सिंह के मुताबिक, अमनदीप ट्रक ड्राइवर है। एक साल पहले वह गुना में नशे के साथ पकड़ाया था। उस पर एनडीपीएस का केस दर्ज हुआ था। हालांकि वह इंदौर या उज्जैन जाने से इनकार कर रहा है। उसका पहचान-पत्र यहां कैसे कैसे पहुंचा, यह साफ नहीं हुआ। इस बीच यह सुराग भी पुलिस को मिला है कि ज्ञान सिंह व लाल सिंह जिस धर्म स्थल से जुड़े थे, वहां एक खानाबदोश आता था। पत्र मामले में उसकी भूमिका होने की पुख्ता जानकारी अफसरों को मिली है। वह धर्मस्थल पर कई बार विवाद कर चुका है, उसकी पहचान हो गई, लेकिन हाथ नहीं लगा। कमिश्नर हरिनारायणाचारी मिश्र के मुताबिक, आपसी विवाद में पत्र भेजने वाले की शिनाख्त हो गई है, लेकिन पकड़ में नहीं आया। उसे पकडऩे पर पत्र भेजने का कारण स्पष्ट होगा।

उज्जैन की 33 डाक पेटियों के आसपास तलाश जारी


पत्र में ज्ञान सिंह का नाम लिखा होने से पुलिस ने उससे पूछताछ की है। ज्ञान सिंह गुरुद्वारे का सेवादार था, जहां दूसरे सेवादार लाल सिंह से विवाद हुआ था। लाल सिंह से भी पुलिस पूछताछ कर रही है। मामला दोनों की रंजिश से भी जोड़ा जा रहा है। पत्र में ज्ञान सिंह का मोबाइल नंबर लिखा था। तीन मोबाइल नंबर और लिखे थे, जो ज्ञान सिंह के परिचितों के निकले। एक नंबर बंद है, जिसकी जानकारी जुटाई जा रही है। डीसीपी, एडिशनल डीसीपी प्रशांत चौबे, एसीपी दिशेष अग्रवाल व टीआइ योगेशसिंह तोमर संदेहियों से पूछताछ कर रहे हैं। ज्ञान सिंह का चार साल पहले लाल सिंह से विवाद हुआ था।

33 डाक पेटियों तक पुलिस पहुंची

उधर, पुलिस को पता चला है कि पत्र उज्जैन से पोस्ट हुआ है। एक टीम वहांं भेजी है। उस दिन उज्जैन शहर की 33 डाक पेटियों से पत्र जीपीओ में आए थे। 33 डाक पेटियों तक पुलिस पहुंची, लेकिन अधिकांश सीसीटीवी कैमरे की जद में नहीं हैं। पुलिस आसपास के सीसीटीवी से पत्र डालने वाले का सुराग हासिल करने का प्रयास कर रही है। एक मोबाइल नंबर राजस्थान का होने से वहांं की पुलिस की भी मदद ली जा रही है। आइबी व एसटीएफ की टीमें भी लगातार छानबीन कर रही हैं।

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