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एमपी का अजब गजब गांव, जीवित रहते हुए ही निकाल देते अंतिम यात्रा

Amba Chandan of Mhow कई दशकों से यह परंपरा चली आ रही है।

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Last journey of a living person in Amba Chandan of Mhow in Indore

Last journey of a living person in Amba Chandan of Mhow in Indore

Last journey of a living person in Amba Chandan of Mhow in Indore एमपी वाकई अजब गजब है। यहां हैरान कर देनेवाले कई मामले सामने आते रहते हैं। एमपी के इंदौर के एक गांव में भी ऐसी ही एक अजीबोगरीब घटना हुई। दुनियाभर में जहां मुर्दों की अर्थी निकाली जाती है वहीं इस गांव में एक जीवित व्यक्ति की अंतिम यात्रा निकाली गई। मुर्दे की बजाए जिंदा आदमी की इस अंतिम यात्रा में पूरा गांव शामिल हुआ। हैरानी की बात तो यह है कि गांव में जीवित व्यक्ति की अंतिम यात्रा पहली बार नहीं निकाली गई। यहां के बुजुर्गों के मुताबिक कई दशकों से यह परंपरा चली आ रही है।

मध्यप्रदेश की व्यवसायिक राजधानी इंदौर के पास यह गजब घटना हुई। इंदौर जिले की महू तहसील के आंबा चंदन में जिंदा व्यक्ति की अंतिम यात्रा निकाली गई। आंबा चंदन के ग्रामीणों के अनुसार यहां पहले भी जीवित व्यक्तियों की अंतिम यात्रा निकाली जा चुकी है। गांव की यह प्रथा काफी पुरानी है।

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आंबा चंदन गांव 17 सौ हैक्टेयर में फैला है। गांव की कुल आबादी 3185 है। इनमें 1681 पुरुष हैं और शेष 1564 महिलाएं शामिल हैं। आंबा चंदन में अधिकांश ग्रामीण साक्षर हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार यहां की कुल साक्षरता 64 प्रतिशत है। गांव में 71 प्रतिशत पुरुष साक्षर हैं जबकि 56 प्रतिशत महिलाएं भी साक्षर हैं।

आंबा चंदन गांव के लोग बारिश के लिए जीवित व्यक्तियों की अंतिम यात्रा निकालते हैं। गांववाले बताते हैं कि जब जब भी मानसून के सीजन में पानी नहीं गिरता या कम बरसात होती है तब तब यहां किसी जीवित व्यक्ति की बाकायदा अर्थी सजाकर उसे गांवभर में घुमाते हैं। जीवित व्यक्ति की अर्थी सजाई जाती है, उस पर फूल मालाएं चढ़ाते हैं और फिर गांववाले उसे अपने कंधों पर उठाकर अंतिम यात्रा पर निकलते हैं। जीवित व्यक्ति की अर्थी पूरे गांव में घुमाते हैं।

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मान्यता है कि इससे अच्छी बारिश होती है। इस बार गांव और आसपास अभी तक जोरदार बरसात नहीं हुई इसलिए आंबा चंदन के लोगों ने अपनी पंरपरा का सहारा लिया।