-सीवर सफाई मशीन खरीदी घोटाला : मामले में आठ अफसर और दो अन्य लोग फंसे
नितेश पाल
इंदौर. शहर में सीवरेज सफाई के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। इंदौर संभागायुक्त डॉ. पवन शर्मा, निगमायुक्त प्रतिभा पाल सहित निगम के आठ अफसर और दो अन्य लोगों के खिलाफ लोकायुक्त संगठन ने जांच प्रकरण दर्ज कर लिया है। लोकायुक्त संगठन ने इस मामले में जांच शुरू भी कर दी है।
नगर निगम में सीवरेज लाइनों की सफाई के लिए सुपर जेटिंग मशीनों को खरीदने में घोटाले का ये खेल है। शिकायतकर्ता दिग्विजय सिंह भंडारी ने आरोप लगाया है कि नगर निगम ने मशीनों की खरीदी के लिए 3 फीसदी ब्याज दर पर 13.31 करोड़ रुपए का कर्जा राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी फाइनेंस एंड डेवलमेंट कॉर्पोरेशन नई दिल्ली से 31 मार्च 2020 को लिया था। लेकिन इस कर्ज की शर्त थी कि राशि मिलने के 90 दिनों में उसका उपयोग करना है, नहीं करने पर 1.5 फीसदी की दर से नॉन यूटीलाइजेशन चार्ज देना होगा। 90 दिनों की ये टाइम लाइन 30 जून 2020 को ही पूरी हो गई थी लेकिन अभी तक इन मशीनों से काम नहीं लिया जा रहा है, जिसके कारण नगर निगम को 13 करोड़ रुपए का 1.5 फीसदी पैसा अतिरिक्त लग रहा है।
गाड़ी खरीदी टेंडर में भी खेल
यही नहीं, गाडिय़ों की खरीदी के लिए जो टेंडर किए गए थे, उसमें भी खेल कर दिया गया। 29 गाडिय़ों की खरीदी और पांच साल तक उनका संधारण और संचालन करने के लिए छह टेंडर जारी किए गए थे। ये टेंडर नगर निगम ने इंदौर की ओम स्वच्छता कॉर्पोरेशन नामक फर्म को दिया था। इंदौर की फर्म ने जो दस्तावेज शर्तों को पूरा करने के लिए वडोदरा की ओम स्वच्छता कॉर्पोरेशन के दस्तावेज लगाए थे। इन दस्तावेजों में बताया गया था कि कंपनी ने साउथ दिल्ली में वर्ष 2013 से 2020 तक इसी तरह के टेंडर का काम किया है। टेंडर लेने वाली इंदौर की फर्म प्रोपायटर फर्म है, जबकि दिल्ली में टेंडर लेने वाली ओम स्वच्छता कॉर्पोरेशन एक कंपनी है।
कंपनी ने लगाए फर्जी दस्तावेज
यही नहीं, टेंडर लेने के लिए कंपनी ने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया, इसे निगम प्रशासक रहे संभागायुक्त डॉ. पवन शर्मा, निगमायुक्त प्रतिभा पाल, पूर्व अपर आयुक्त संदीप सोनी सहित अन्य अफसरों ने न सिर्फ स्वीकृति दी, साथ ही पूर्व में आई टेंडर से कहीं ज्यादा राशि 87.77 करोड़ रुपए इन मशीनों की खरीदी के लिए कंपनी को दे भी दिए। साथ ही इनकी डिलेवरी भी लेकर उन्हें भानगढ़ स्थित निगम के डिपो में खड़ा रखा गया है। लेकिन उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है।
इस शिकायत के आधार पर लोकायुक्त संगठन ने निगम के प्रशासक रहे संभागायुक्त डॉ. शर्मा, निगमायुक्त पाल, पूर्व अपर आयुक्त सोनी, देवेंद्रसिंह, अपर आयुक्त वीरभद्र शर्मा, अधीक्षण यंत्री अशोक राठौर, कार्यपालन यंत्री सुनील गुप्ता, सहायक यंत्री सेवकराम पाटीदार के साथ ही वडोदरा की कंपनी के मुकेश पटेल और इंदौर की कंपनी के आशुतोष भोदावत के खिलाफ भी जांच प्रकरण दर्ज कर लिया है। इसकी जांच उप पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त संगठन संतोष सिंह भदौरिया के द्वारा शुरू भी कर दी गई है।
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शिकायत पुरानी है। इनका कोई आधार नहीं है। तीन बार टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही हमने टेंडर दिया था, आरोप निराधार हैं।
-संदीप सोनी, पूर्व अपर आयुक्त