
Netherlands couple (Photo Source - Patrika)
MP News: मध्यप्रदेश की ग्रामीण संस्कृति, खान-पान और पहनावे के मुरीद केवल देशवासी ही नहीं, बल्कि विदेशी भी हैं। खासकर नर्मदा का पावन तट तो बरबस लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। ऐसे ही नीदरलैंड के एक दंपती गूगल सर्च करते हुए बोथू गांव पहुंचे। यहां का वातावरण उन्हें इतना भाया कि पांच दिन तक होम स्टे में निमाड़ की ग्रामीण संस्कृति और आत्मीय मेहमाननवाजी का लुत्फ उठाया और तो और गांव में तैयार गोबर के कंडे भी यादगार के तौर पर अपने साथ ले गए।
दरअसल, नर्मदा तट किनारे स्थित बोथू गांव में ग्रामीण परिवेश में बने होम-स्टे विदेशी सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। यहां पहली बार नीदरलैंड से एरेना और उनके पति पीटर पहुंचे। दोनों करीब पांच दिन तक यहां ठहरे। पत्रिका से चर्चा में बताया कि दोनों सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने यहां की लोकेशन गूगल पर सर्च कर देखी।
प्रकृति और रहन-सहन अच्छा दिखा तो घूमने आ गए। एरेना और पीटर भारतीय संस्कृति से इतने प्रभावित हुए कि वे गांव में तैयार गोबर के उपले भी स्मृति के रूप में अपने साथ नीदरलैंड ले गए। उन्होंने कहा- यहां के लोग बेहद सरल, सहयोगी और दिल से आदर-सत्कार करने वाले हैं। निमाड़ी संस्कृति की तारीफ करते हुए उन्होंने ग्रामीणों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।
अमाड़ी भाजी और दाल-बाटी खाईः नीदरलैंड के दंपती ने यहां, प्रवास के दौरान कई किसान परिवारों से संपर्क किया और खेती का तरीका जाना। वहीं निमाड़ी व्यंजन अमाड़ी की भाजी, ज्वार की रोटी, दाल-बाटी आदि का लुत्फ उठाया। इन्होंने आसपास के प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण कर हरियाली, पशु-पक्षियों और खेतों की सुंदरता को कैमरे में कैद किया। इतना ही नहीं, सहस्रधारा के विहंगम दृश्य देखकर भी वे अभिभूत नजर आए। उनका कहना था कि मां नर्मदा की अविरल धाराओं और प्रकृति के इस अद्भुत संगम जैसा नजारा उन्होंने दुनिया में कहीं नहीं देखा।
होम स्टे संचालक सागर पटेल ने बताया- यह पहला मौका है जब यहां विदेशी मेहमान ठहरे। मिट्टी से बने घर, गांव का शांत वातावरण और खेती-किसानी का अनुभव विदेशी मेहमानों को बेहद पसंद आया। करण सिंह पटेल ने कहा- नर्मदा तट पर ऐसे स्वदेशी होम-स्टे को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, ताकि पर्यटन के साथ क्षेत्र का विकास भी हो सके।
Published on:
12 Jan 2026 11:27 am
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