टॉरी कॉर्नर -यादों के झरोखों से....मल्हारगंज क्षेत्र का टोरी कॉर्नर चौराहा पश्चिम इलाके की राजनीति का गढ़, फक्कड़ नेता लालजी-होमी दाजी का सभा सुनने दूर-दूर से आते थे लोग
मल्हारगंज क्षेत्र का टोरी कॉर्नर चौराहा पश्चिम इलाके की राजनीति का गढ़ है। चौराहे पर चौपाल चर्चा आम बात है। यहां लोगों की भीड़ लगने लगी तो चाय की दुकान की शुरुआत हुई। जापानी कप में चाय पिलाई तो किसी ने ब्रिटेन के दल की टोरी पार्टी को याद रख टोरी कॉर्नर नाम रख दिया। यहां अकसर नेताओं की सभाएं होती तो दूर-दूर से लोग सुनने आते। राजबाड़ा से लेकर टोरी कॉर्नर तक मजमा लग जाता था।
वर्ष 1965 के दौर में मल्हारगंज के चौराहे का नाम टोरी कॉर्नर पड़ा। यहां आए दिन चौपाल बैठती और लोग चुनावी चर्चा करते। उस जमाने में तो रेडियो का भी लाइसेंस जारी होता था। यहां पान की दुकान पर रेडियो बजता तो शाम 8.15 बजे समाचार सुनने भीड़ लग जाती। भीड़ को देखते हुए चाय की दुकान की शुरुआत हुई। चाय बड़े जापानी कप में पिलाई जाती थी। उस जमाने के समाजवादी नेता, व्यापारी, समाजसेवी का यहां जमघट लगता था। चाय व जापानी कप के आधार पर किसी ने ब्रिटेन की कंजर्वेटिव पार्टी की टोरी पार्टी की याद दिलाई और चौराहे का नाम पड़ गया टोरी कॉर्नर।
सभा में बुलाते थे 3-4 जोड़ कपड़े की व्यवस्था होती
आज के नेता लग्जरी गाड़ी में नजर आते हैं, लेकिन 1975-76 के दौर के नेता अलग ही थे। लोग आपस मेें चंदा कर चुनाव लड़वाते थे। उस जमाने के समाजवादी फक्कड़ नेता थे लालजी मोहन निगम। वे राज्यसभा सदस्य भी रहे। फक्कड़ इसलिए कि उनके पास कुछ नहीं था, पहनने के कपड़े भी नहीं होते थे। स्थानीय लोग उनको सभा के लिए बुलाते तो 3-4 जोड़ कपड़े की व्यवस्था करते। लालजी मना करते, लेकिन लोगों के प्रेम में इनकार नहीं कर पाते। लालजी हों या होमी दाजी या फिर जगन्नाथ जोशी। चुनावी दौर में टोरी कॉर्नर पर इनकी सभा होती तो पूरा इलाका भीड़ से पट जाता था। दूर-दूर से लोग इन्हें सुनने आते थे।
(जैसा कि शेखर गिरी ने बताया।)