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होलकर स्टेट से बना रहे ‘दशानन’

विधि-विधान से शस्त्र पूजन और कारीगरों के सम्मान के बाद रावण बनाने का काम शुरू किया जाता है। दशहरा मैदान में जलने वाले रावण के पुतले का इतिहास 50 वर्षों से भी ज्यादा पुराना हैं। होलकर स्टेट के समय में 30 फीट का रावण बनाने की शुरूआत हुई थी। जो अब दशहरा महोत्सव समिति द्वारा 100 फीट से अधिक का बनाया जाने लगा है।

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इंदौर

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Ramesh Vaidh

Sep 23, 2022

होलकर स्टेट से बना रहे ‘दशानन’

इंदौर. शहर के दशहरा मैदान में जलने वाले रावण के पुतले का इतिहास 50 वर्षों से भी ज्यादा पुराना हैं। होलकर स्टेट के समय में 30 फीट का रावण बनाने की शुरूआत हुई थी। जो अब दशहरा महोत्सव समिति द्वारा 100 फीट से अधिक का बनाया जाने लगा है। इसे बनाने में एक महीने का वक्त और 100 से 150 कारीगरों की मेहनत तो लगती ही है, साथ ही काफी सामान का इस्तेमाल भी होता है। इसके बाद शहर के सबसे ऊंचे 111 फीट के रावण के पुतले को तैयार किया जाता है। इस आकर्षक रावण को देखने के लिए शहर के के लोग परिवार सहित आते है। दशहरा मैदान का रावण बनाने की शुरुआत अनंत चतुर्दशी के दो दिन पहले से हो जाती है। विधि-विधान से शस्त्र पूजन और कारीगरों के सम्मान के बाद रावण बनाने का काम शुरू किया जाता है। शहर के रामबाग इलाके में बने एक स्कूल में ही रावण का कुछ भाग बनाने का काम किया जाता हैं।
इस वर्ष 111 फीट का रावण और 250 फीट की लंका का हो रहा निर्माण: दशहरा महोत्सव समिति दशहरा मैदान के संयोजक सत्यनारायण सलवाडिया ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण पिछले दो वर्षों से छोटे रावण का ही निर्माण किया गया था, लेकिन इस साल पूरे उत्साह के साथ समिति के लोग और कारीगर रावण बनाने में जुटे है। कारीगर अपने-अपने तरीकों से बांस, लकड़ी सहित अन्य चीजों का इस्तेमाल कर रावण के दस सर, धड़ और पैर तैयार करते हैं। जिसके बाद कपड़ा आदि लगाकर रंग रोगन किया जाता है। इस वर्ष रावण की ऊंचाई 111 फीट रहेगी साथ ही 250 फीट की लंका का भी निर्माण किया जा रहा है।
स्कूल से ढांचा तैयार कर दशहरा मैदान ले जाते हंै रावण
शहर के एक निजी स्कूल में रावण का ढांचा तैयार किया जाता है, फिर दशहरा मैदान ले जाया जाता है, जहां रावण को अंतिम रूप देकर उसे मैदान में खड़ा किया जाता है। इसमें मशीन और कारीगरों की मदद ली जाती है। रावण के तैयार होने के बाद दशहरे के पहले ही यहां लोग बड़ी संख्या में परिवार के साथ देखने पहुंचते है।
उज्जैन, देवास और खरगोन के कारीगर मिलकर बनाते हैं रावण
दशहरा महोत्सव समिति दशहरा मैदान के कार्यकर्ताओं ने बताया कि हर साल अलग-अलग शहरों जैसे उज्जैन, देवास, खरगोन के कारीगर रावण का पुतला बनाने का काम करते है। इसमें खर्चा भी बहुत आता है जो दशहरा समिति मिलकर करती है। रावण का पुतला और लंका बनाने से लेकर घोड़े, बग्घी, शोभायात्रा और अन्य खर्च को मिलाकर करीब दो से ढाई लाख रुपए का खर्च आता है। खेमा इंडस्ट्रीज द्वारा लगातार 50 सालों से लंका बनाने और रावण में लगाने के लिए पटाखे नि:शुल्क दिए जाते हैं।

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