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सिंधी भाषा और संस्कृति को हम रखेंगे जीवित

अभा सिंधी समाज का दुबई में भारत से 418 और विश्व के अनेक मुल्कों से 75 प्रतिनिधि शामिल हुए

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इंदौर

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Amit Mandloi

Mar 15, 2018

Sindhi Samaj

इंदौर. सामाजिक संस्था अभा सिंधी समाज का दुबई में आयोजित 25वां सिल्वर जुबली सम्मेलन में सिंधी भाषा, संस्कृति व सभ्यता को जीवित रहने का संकल्प लेकर विश्व सिंधी समाज पर यह सम्मेलन गहरी छाप भी छोड़ गया। सिंधी समाज में बुराइयों और कुरीतियों को बंद करने पर विचार हुआ।
समाज के प्रदेश अध्यक्ष जेपी मूलचंदानी ने बताया, समाजसेवी व उद्योगपति वासु श्राफ मुख्य अतिथि और समाज सेवी श्रीराम बक्शानी ने अध्यक्षता की। अशोक सावलानी, रमेश सावलानी, सीके रामचंदानी, सिंधियम के लिए काम करने वाली दुबई की जानी मानी हस्ती आशा चांद सहित अनेक प्रवासी भारतीय समाजसेवियों ने विशेष अतिथि के रूप में शामिल होकर सम्मेलन को सफल बनाया। सम्मेलन के दौरान भव्य व आकर्षक सिंधी गीत संगीत का कार्यक्रम भी हुआ, जिसमें देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों ने नृत्य कर अपनी प्रतिभा का भव्य प्रदर्शन किया। अभा सिंधी समाज के पदाधिकारी सतीश वासवानी, रमेश तनवानी, सुरेश जेसवानी, प्रकाश हिंगोरानी, जेठानन्द खानचंदानी, खेमचंद तेजवानी, कैलाश आसूदानी, सोना पारदासानी, जे पी मूलचंदानी सहित तमाम प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कार्यवाहक अध्यक्ष मुरली बलवानी ने सम्मेलन के औचित्य पर रोशनी डाली। इस मौके पर अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर शाल से सम्मानित किया।

सम्मेलन में बोले यह अतिथि
- वरिष्ठ समाज सेवी राम बक्शानी ने कहा, सिंधी पानी की तरह है। आजादी के बाद सिंधी जहां जहां भी गए वहां पानी की तरह सभी अन्य समाजों में घुल मिलकर रहने लगे और यही उनकी तरक्की का आधार व कारण है। सिंधी परम्पराओं, व्यंजनों, संस्कृति व सभ्याता को हर हालत में जीवित रखने का आव्हान करते हुए कहा कि यही हमारी पहचान है, जिसे अगर भूलाया गया तो हमारा अस्तित्व खत्म हो जाएगा।

- सम्मेलन के मुख्य अतिथि वासु श्राफ ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि इतनी अधिक संख्या में प्रतिनिधि दुबई में जुटे हैं, जो कि एक रिकार्ड है। आपने सिंधी भाषा को हर हालत में जीवित रखने एवं बोलचाल में इसका इस्तेमाल करने पर जोर दिया।
- विशेष अतिथि अशोक सावलानी ने कहा, जिन्होंने भारत देश में अनेक शहरों के सिंधी गरीब परिवारों के लिए आवास योजना को अंजाम देकर उनका जीवन स्तर उठाने का महत्वपूर्ण काम किया है वे सम्माननीय हैं।

- डॉ. आशा चांद ने कहा, सिंधी अरबी लिपि का ज्ञान आज की युवा पीढ़ी व छोटे स्कूली विद्यार्थियों को किस तरह से दिया जा सकता है, उस पर योजना बनाने की जरूरत है।