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अफसर के अंगूठे की माया, नहीं लगा तो अटक गए हजारों लाइसेंस

परिवहन विभाग में एक अधकारी के अंगूठे की माया ही निराली है। अधिकारी के अंगूठे का इंतजार हजारों आवेदकों के दस्तावेज कर रहे हैं। अधिकारी और उनके बाबू के पास आमजन के काम के लिए समय ही नहीं है। वे कार्यालय में बैठे तो रहते है, लेकिन दस्तावेजों का सत्यापन करने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। लाइसेंस की कतार में लगे आवेदक रोज परिवहन कार्यालय के चक्कर काट रहे, लेकिन काम नहीं हो पा रहा है।

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RTO/ Nayta Mundla एजेंट और एवजी के चंगुल में आरटीओ कई गुना पैसा देने को मजबूर आवेदक

इंदौर।

परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी चाहे जितने नवाचार कर लें और आवेदकों को राहत देने के लिए ऑनलाइन सुविधाएं शुरू कर दें, लेकिन इंदौर परिवहन विभाग में बैठे कुछ अधिकारी उनकी मेहनत-मंशा पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ट्रायल में पास होने वाले आवेदकों को दो से चार महीने गुजर जाने के बाद भी लाइसेंस नहीं मिल रहे हैं। आवेदक कार्यालय और एजेंटों के च?कर काट-काट कर थक गए। जिन अफसरों के पास ये ज्मिेदारी है, उनके पास थ्ब लगाने की फुर्सत तक नहीं है। इससे हजारों आवेदकों के लाइसेंस अटके हुए हैं।

दरअसल नायता मुंडला क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय अपनी अव्यवस्थाओं के लिए पहले ही बहुत बदनाम हो चुका है। अब लाइसेंस शाखा में मौजूद अफसरों की लापरवाही और निष्क्रियता की वजह से हजारों आवेदक परेशान हो रहे हैं। लाइसेंस के लिए ट्रायल देने के बाद भी दो से चार महीने बीत जाने के बाद भी लाइसेंस नहीं मिल रहे हैं। इतना ही नहीं, कई आवेदकों के पास यह भी जानकारी नहीं भेजी जाती है कि वे ट्रायल में पास हुए हैं या फेल। सूत्रों का कहना है कि अभी करीब पांच हजार से अधिक आवेदकों को लाइसेंस का इंतजार है।

परेशान लोगों का कहना है

आरटीओ के ज्मिेदार अधिकारी आम जनता के प्रति कितने ज्मिेदार हैं,इनकी हकीकत उन आवेदकों से जानी जा सकती है जो दो से चार महीने से परेशान हो रहे हैं। कालानी नगर क्षेत्र के निवासी दीपक चौहान प्राइवेट नौकरी करते हैं, उन्होंने ट्रायल देने के लिए ऑफिस से एक दिन की छुट्टी लेकर आरटीओ कार्यालय पहुंचकर ट्रायल दिया। पास भी हुए, लेकिन अब तक लाइसेंस हाथ में नहीं आ पाया। लर्निंग लाइसेंस भी एक्सपायर होने आ गया है। यही स्थिति द्वारकापुरी क्षेत्र में निवास करने वाले पंकज पवार की है। उन्होंने भी जनवरी में ट्रायल दिया और पास हुए, लेकिन लाइसेंस नहीं बना। गुहार लगाकर हारे -
बंगाली चौराहा निवासी आवेदक ने बताया कि वे ट्रायल पर गए थे, गाड़ी लंबी होने से ट्रायल में फेल हो गए, लेकिन अफसरों ने अब तक दस्तावेज नहीं दिए ताकि आगे की प्रक्रिया फिर से कर सकें, वे एजेंट और अफसरों से गुहार लगाकर थक गए। इस संबंध में एआरटीओ यादव से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने जबाव नहीं दिया। वहीं आरटीओ जितेंद्र रघुवंशी से संपर्क नहीं हो पाया।

एआरटीओ के पास समय नहीं

जानकारों की मानें तो पक्के लाइसेंस के लिए आवेदकों को कार्यालय आकर ट्रायल देनी होती है। ट्रायल देने के बाद उनके लाइसेंस जारी होते हैं। हालांकि लाइसेंस प्रिंट की ज्मिेदारी स्मार्ट चिप कंपनी के पास है, लेकिन स्मार्ट चिप कंपनी के पास दस्तावेज पहुंचाने की ज्मिेदारी लाइसेंस शाखा प्रभारी एआरटीओ हदेश यादव के पास है। यादव और उनके बाबू को दस्तावेज को सत्यापित करना होता है। यह ऑनलाइन प्रक्रिया होती है और थ्ब ( बायोमेट्रिक प्रक्रिया के तहत अंगूठा) लगाकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होता है। हजारों आवेदकों के आवेदन कार्यालय की शोभा बढ़ा रहे हैं, अफसर के पास इन्हें सत्यापित कर थम्ब (अंगूठा) लगाने की फुर्सत तक नहीं है।