31 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मेहुल चोकसी ने और बढ़ाई बैंकों की मुसीबत, मार्च तिमाही में 8,000 करोड़ बढ़ी एनपीए की राशि

मार्च तिमाही में बैंकों के एनपीए यानि बैड लोन में 8.000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है।

2 min read
Google source verification
NPA

नई दिल्ली। एनपीए की मार से जुझ रहे बैंकों के लिए एक और बुरी खबर है। मार्च तिमाही में बैंकों के एनपीए यानि बैड लोन में 8.000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंकों को पिछले वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही के लिए सिर्फ गीतांजलि जेम्स को लेकर 8 हजार करोड़ रुपये के प्रावधान करने होंगे। इससे साफ हो जाता है कि गीताजंलि जेम्स के मुखिया मेहुल चौकसी जो बैंकों का पैसा लेकर देश छोड़कर भाग चुके हैं। जिसके चलते बैंकों को 8000 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान करना होगा। पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के दौरान एनपीए बनने वाले बड़े खातों में गीतांजलि भी शामिल है। दिसंबर तिमाही तक बैंकों का समग्र एनपीए 8,40,958 करोड़ रुपये था। इसमें सर्वाधिक हिस्सेदारी औद्योगिक लोन की थी।

चौंकाने वाले आंकड़े
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के फंसे हुए कर्जे में सबसे बड़ी हिस्सेदारी कॉर्पोरेट लोन की है। आंकड़ों के मुताबिक यह हिस्सेदारी लगभग तीन चौथाई है। आंकड़ों के मुताबिक सरकारी बैंकों का कुल 6.41 लाख करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है। इसमें उद्योग जगत की हिस्सेदारी चार लाख 70 हजार करोड़ के करीब है। यह बैंकों द्वारा दिए गए कुल कर्ज का करीब 37 फीसदी है।

किस सेक्टर पर कितना एनपीए
भारतीय रिजर्व बैंक ने जो आंकड़ें जारी किए है उनके मुताबिक कर्ज में 22.83 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले रीटेल सेक्टर में एनपीए का आंकड़ा केवल 3.71 फीसदी (23,795 करोड़ रु) है। जबकि इसके अलावा कृषि क्षेत्र में यह नौ फीसदी और सेवा क्षेत्र में 13.21 फीसदी है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल 6.41 लाख करोड़ एनपीए में 4.70 लाख करोड़ रुपये 31 मार्च, 2017 तक उद्योग को दिए गए ऋण में से था। जबकि रिटेल लोन में एनपीए का यह हिस्सा 23,795 करोड़ रुपये था।

किस बैंक पर कितना फीसदी एनपीए
31 दिसंबर 2017 तक बड़े उद्योगों के एनपीए अनुपात के मामले में, इंडियन ओवरसीज बैंक 44.29 प्रतिशत के साथ सबसे ऊपर था। जबकि आईडीबीआई बैंक का अनुपात 42.69 प्रतिशत, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का 25.0 9 प्रतिशत, इलाहाबाद बैंक 36.94 प्रतिशत, बैंक ऑफ महाराष्ट्र 36.58 प्रतिशत, आईसीआईसीआई बैंक 20.83 प्रतिशत था।

किस बैंक पर कितना एपीए
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि बैंकों पर कुल 7.34 लाख करोड़ का एनपीए हैं। जिसमें सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 77 फीसदी की है।









































बैंकएनपीए (रु में)
एसबीआई1.99 लाख करोड़
पीएनबी57,630 करोड़
बैंक ऑफ इंडिया49,307 करोड़
बैंक ऑफ बड़ौदा46,307 करोड़
कैनरा बैंक39,164 करोड़
Story Loader