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र्इ-कॉमर्स छूट पर प्रतिस्पर्धा आयोग ने उठाए सवाल, कहीं कंज्यूमर्स के साथ धोखा तो नहीं हो रहा

सीसीआर्इ ने वाणिज्य मंत्रालय को पत्र भेजकर र्इ-कॉमर्स कंपनियों द्वारा दिए जा रहे छूट पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या इसके जरिए ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा है?

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Saurabh Sharma

Aug 04, 2018

E commerce

र्इ-कॉमर्स छूट पर प्रतिस्पर्धा आयोग ने उठाए सवाल, कहीं कंज्यूमर्स के साथ धोखा तो नहीं हो रहा

नई दिल्ली। र्इ-कॉमर्स कंपनियों द्वारा उत्पादों में दी जारी छूट पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआर्इ) भी सक्रिय हो गया है। सीसीआर्इ ने वाणिज्य मंत्रालय को पत्र भेजकर र्इ-कॉमर्स कंपनियों द्वारा दिए जा रहे छूट पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या इसके जरिए ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा है? आयोग ने मंत्रालय से र्इ-कॉमर्स कंपनियों के व्यापारिक नियमन के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारियां भी मंगाई है। र्इ-कॉमर्स नीति में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआर्इ) और छूट को लेकर प्रावधान के अलावा यह सवाल उठाया गया है कि र्इ-कॉमर्स कंपनियां छूट के जरिए बाजार को कितना प्रभावित कर रही हैं और यह कितना उचित है।

कढ़े कदम उठा सकता है सीसीआर्इ
खबरों के मुताबिक मंत्रालय के जवाब के बाद आयोग खुद कड़े कदम उठा सकता है। वाणिज्य मंत्रालय ने फिलहाल इतना ही कहा है कि एक उच्च स्तरीय समिति इ-कॉमर्स में एफडीआइ समेत अन्य सभी पहलुओं पर गौर कर रही है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि दिशा-निर्देश कब तक जारी होंगे।

शिकायत के बाद उठाया कदम
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने र्इ-कॉमर्स कंपनियों द्वारा भारी छूट के साथ बिक्री के तरीकों को गैरकानूनी बताते हुए सीसीआर्इ से शिकायत की थी। इसी शिकायत को आधार बनाकर सीसीआर्इ ने वाणिज्य मंत्रालय को पत्र भेजा है।

क्या करती हैं कंपनियां
र्इ-कॉमर्स कंपनियां कुछ उत्पादों के दाम बढ़ाकर छूट देती हैं जिससे ग्राहकों को खास फायदा होने की बजाय उनका नुकसान होता है क्योंकि उनका बाजार मूल्य कम होता है। कुछ कंपनियां कैशबैक ऑफर के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करती हैं लेकिन ऐसे ऑफर में कुछ शर्तें भी जुड़ी होती हैं जो कंपनियों के हक में जाती हैं। जैसे कि कुछ इ-कॉमर्स कंपनियां खरीद के कुछ समय बाद कैशबैक देती हैं, इस अवधि तक यह रकम उनके कारोबार में लगी रहती है। इससे कंपनियों को छूट से हुए नुकसान की भरपाई हो जाती है।

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