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जेट एयरवेजः नकदी के लिए नरेश गोयल एतिहाद एयरवेज के साथ ले सकते हैं ये बड़ा फैसला

वित्तीय संकट को देखते हुए नरेश गोयल जेट एयरवेज को बचाने के लिए मिडल र्इस्ट की एतिहाद एयरवेज विमान कंपनी से मदद मांग सकते हैं। ताजा नकदी प्रवाह के लिए नरेश गोयल कंपनी आॅपरेशन की जिम्मेदारी एतिहाद एयरवेज को सौंप सकते हैं।

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Naresh Goyal Jet Airways

जेट एयरवेजः नकदी के लिए नरेश गोयल एतिहाद एयरवेज के साथ ले सकते हैं ये बड़ा फैसला

नर्इ दिल्ली। भारी वित्तीय घाटे में चल रही विमान कंपनी जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल कंपनी को उबारने के लिए हर संभव प्रयास में लगे हुए हैं। वित्तीय संकट को देखते हुए नरेश गोयल जेट एयरवेज को बचाने के लिए मिडल र्इस्ट की एतिहाद एयरवेज विमान कंपनी से मदद मांग सकते हैं। ताजा नकदी प्रवाह के लिए नरेश गोयल कंपनी आॅपरेशन की जिम्मेदारी एतिहाद एयरवेज को सौंप सकते हैं। जेट एयरवेज का यह प्लान इक्विटी व साॅफ्ट लोन के माध्यम से नकदी जुटाने का है। हालांकि नरेश गोयल कंपनी के चेयरमैन पद पर बने रहेंगे।


एतिहाद के प्रबंधन टीम से दुबर्इ में गोयल की बैठक

इस मामले से जुड़े सूत्रों ने जानकारी दी है कि पिछले रविवार को नरेश गोयल व उनकी टीम ने एतिहाद एयरवेज की प्रबंधन टीम से मिली है। इस बैठक में एतिहाद एयरवेज के मुख्य कार्यकारी निदेशक (सीर्इआे) टोनी डग्लस भी थे। इस बैठक के बाद गोयल ने अपनी प्रबंधन टीम के साथ भी दुबर्इ में लंबी बैठक की है। पिछले सप्ताह, एक बिजनेस चैनल ने जेट एयरवेज व एतिहाद के बीच डील का दावा किया था।


जेट एयरवेज में एतिहाद की 24 फीसदी हिस्सेदारी

वर्तमान में जेट एयरवेज में एतिहाद की कुल 24 फीसदी हिस्सेदारी है जबकि नरेश गोयल व उनकी पत्नी अनिता गोयल की कुल 51 फीसदी हिस्सेदारी है। यदि दोनों के बीच यह डील होता है कि एतिहाद इक्विटी में आैर पूंजी लगा सकती है। इक्विटी विस्तार के माध्यम से कंपनी 49 फीसदी तक अपनी हिस्सेदारी को बढ़ा सकती है। नकदी प्रवाह को बढ़ाने के लिए गोयल अपने स्टे को करीब 15 फीसदी तक डाइल्यूट करना का फैसला भी ले सकते हैं।


टाटा संस से भी हुर्इ थी जेट एयरवेज की बातचीत

गौरतलब है कि जेट एयरवेज के लिए यह टाटा संस के मुकाबले बेहतर डील हो सकता है। टाटा संस ने जेट एयरवेज में पूरे आेनरशिप स्टेक का प्रस्ताव दिया था। बता दें कि बीते कुछ समय में कर्इ निवेशकों से कंपनी के बातचीत फेल हो चुकी है क्योंकि गोयल कंपनी पर अपना कंट्रोल बनाए रखना चाहते हैं। सूत्रों के मुताबिक, अपने पार्टनर सिंगापुर एयरलाइंस के साथ मिलकर टाटा संस जेट एयरवेज में दो स्टेप में लेनदेन को पूरा करना चाहते थे। इसमें पहला स्टेप रिवर्स मर्जर व दूसरा स्टेप बायआउट का था।


एतिहाद को मिल सकता है फायदा

हालांकि, हाल ही में हुए टाटा संस बोर्ड बैठक के बाद इसपर बातचीत नहीं हो रही है। टाटा के अालावा प्राइवेट इक्विटी फंड टीपीजी भी जेट एेयरवेज पर नजर बनाए हुए है। सभी बातों को ध्यान में रखते हुए बाकी कंपनियों के मुकाबले एतिहाद एयरवेज के लिए स्थिति काफी अनुकूल है। यदि जेट एयरवेज के प्रोमोटर्स शेयर्स बेचने के बारे में सोचते हैं तो वह इसे नकार सकती है।

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