
नर्इ दिल्ली। टेलिकाॅम डिपार्टमेंट मर्जर की मंजूरी से पहले वोडाफोन इंडिया आैर आर्इडिया सेल्यूलर को 18,870 करोड़ रुपए चुकाने को कह सकता है। यह रकम टेलिकाॅम डिपार्टमेंट के पास लाइसेंस फीस, स्पेक्ट्रम यूसेज चार्जेज आैर वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज(आेटीएससी) से संबंधित बकाए को लेकर मांग सकता है। वोडाफोन को लाइसेंस फीस आैर एसयूसी बकाए के रूप में 5532 करोड़ रुपए देनेे है। जबकि वन टाइम स्पेक्ट्रम चार्च के लिए भी 3600 करोड़ रुपए जमा करने हैं। वहीं आइडिया सेल्यूलर का टोटल लाइसेंस फीस 7625 करोड़ रुपए का है आैर आेटीएससी बकाया 2113 करोड़ रुपए का है।
मर्जर से पहले दोनों कंपनियों को देना होगा 19 हजार करोड़ रुपए
एक कंपनी के अधिकारी के मुताबिक, सरकार इसके लिए दाेनों में से किसी भी कंपनी पर दबाव नहीं बना सकेगी क्योंकि ये मामला टेलिकाॅम कंपनी के एडजस्टेड ग्राॅस रेवेन्यू से जुड़ा है। जो कि पिछले एक दशक से अधिक समय से विवादों में घिरा हुआ है। फिलहाल ये मामला न्यायालय में लंबित है। वहीं टेलिकाॅम डिपार्टमेंट के एक अधिकारी का कहना है कि, डिपार्टमेंट मर्जर की मंजूरी से पहले वोडाफोन इंडिया आैर आइडिया सेल्यूलर के पास करीब 19 हजार करोड़ रुपए का डिमांड नोटिस भेजेगा। उन्होंने ये भी कहा कि, यदि कंपनियां लाइसेंस फीस आैर एसयूसी के बकाये को कानूनी रूप से चुनौती देनी हैं तो डिपार्टमेंट वन टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज के लिए बैंक गारंटी की डिमांड करेगा। ये राशि 5713 करोड़ रुपए का है।
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टेलिकाॅम डिपार्टमेंट मर्जर एंड एक्विजिश के नियमों के आधार पर उठाएगा कदम
डिपार्टमेंट ने ये भी साफ कर दिया है कि वो इस कदम को टेलिकाॅम सेक्टर में मर्जर एंड एक्विजिशन के माैजूदा नियमों के आधार पर उठाएगा। आपको बता दें कि टेलिकाॅम सेक्टर की कंपनियां एजीआर रेवेन्यू से लाइसेंस सर्विस हासिल करती हैं। आमतौर पर ये टेलिकाॅम कंपनियां अपने एजीअार रेवेन्यू को 8 फीसदी हिस्स लाइसेंस के तौर पर आैर 5 फीसदी हिस्सा एसयूसी के तौर पर देती हैं। एेसे में इन दोनों से ही सरकार को इस सेक्टर से रेवेन्यू मिलता है।
मर्जर के बाद वोडाफाेन इंडिया होगा लाइसेंसी
टेलिकाॅम डिपार्टमेंट के ही एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, 100 फीसदी एफडीआर्इ के मंजूरी मांगने वाली आइडिया सेल्यूलर, वोडाफोन इंडिया आैर आइडिया सेल्यूलर के तरफ से डिपार्टमेंट से बात कर रही है ताकि कुल बकाया रकम तय की जा सके। इस रकम को दोनों कंपनियाें को मर्जर की मंजूरी से पहले चुकाना है। दरअसल सबसे बड़ी वजह ये है कि मर्जर के बाद से वोडाफोन इंडिया ही लाइसेंसी बनी रहेगी।
Published on:
13 Apr 2018 10:35 am

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