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मप्र के इस शहर में रोज बनती है 50 हजार शर्ट, हाई क्वालिटी और लो प्राइस से छाई

मप्र के इस शहर में रोज बनती है 50 हजार शर्ट, हाई क्वालिटी और लो प्राइस से छाई

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जबलपुर . शहर की शर्ट इंडस्ट्री तेजी से उभर रही है। 200 से अधिक छोटे और बडे़ कारखाने खुल गए हैं। तीन हजार कारीगर व श्रमिक रोजाना 50 हजार शर्ट पीस तैयार करते हैं। यहां के शर्ट महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश सहित देश के आठ राज्यों में जाते हैं। शहर में 8 बडे़ ब्रांड बन गए हैं। प्रदेश में जबलपुर और इंदौर शर्ट इंडस्ट्री के मामले में सबसे आगे हैं। यहां के गारमेंट निर्माताओं ने अपने उत्पादों को बदला है। पहले सबसे ज्यादा सलवार सूट बनते थे।

कई तरह की खूबियां
शहर में शर्ट बनाने वाले कारखाने बढ़ रहे हैं। शर्ट निर्माता सुरेश चांदवानी का कहना है कि जबलपुर में शर्ट इंडस्ट्री ने अलग पहचान बनाई है। यहां की खासियत यह है कि देश के दूसरे राज्यों से कम कीमत और अच्छी गुणवत्ता से यह तैयार किया जाता है। निर्माता तरुण सिंघई का कहना है कि हमारा उद्देश्य ब्रॉन्ड तैयार करना है।

आधा दर्जन बडे़ ब्रॉन्ड
अभी कम संख्या में शर्ट निर्माता रजिस्टर्ड हैं। 70 से अधिक कारखाने अलग-अलग जगहों पर रजिस्टर्ड हैं। वहीं 100 कारखाने अपने लेबल लगाकर शर्ट का उत्पादन और बिक्री करते हैं। इनमें आधा दर्जन बडे़ ब्रॉन्ड हैं। इनके मध्यप्रदेश सहित दूसरे राज्यों में आउटलेट्स हैं। केजुअल और फॉर्मल दोनों तरह के शर्ट बड़े पैमाने पर तैयार किए जा रहे हैं। शहर में सालाना 600 से 700 करोड़ का टर्नओवर है।

वाशिंग प्लांट से उभरेगा नया मार्केट
अभी जो शर्ट बनते हैं, उनमें कम संख्या में वाशिंग वाले पीस होते हैं। जैसे ही रेडीमेड गारमेंट कॉम्पलेक्स में प्लांट चालू होगा, उसके बाद वाशिंग शर्ट का अलग बाजार तैयार हो जाएगा। इसमें कपडे़ जैसा चाहे वैसा स्वरूप दिया जा सकेगा। शर्ट में कपडे़ की साफ्टनेस ज्यादा मायने रखती है। यह मशीनों के माध्यम से होती है। अभी शहर में छोटे वाशिंग एवं डाइंग प्लांट है। उनमें उतना बेहतर काम नहीं हो पाता। लेकिन काम्प्लेक्स में प्लांट लगने से रोजाना 10 हजार पीस की रंगाई व धुलाई हो सकेगी। इससे उत्पादन भी बढ़ेगा।

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