3 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

MP के इस सफेद मकबरे को देखकर शाहजहां ने बनवाया था ‘ताजमहल’ 

यह मकबरा होशंगशाह के समय में ही बना था। ये वास्तु और शिल्प कला का यह बेजोड़ नमूना है।

2 min read
Google source verification

image

Abha Sen

Jul 09, 2016

tomb

tomb

MP में जब टूरिज्म की सैर पर निकलें तो एक से बढ़कर एक सुंदर चीजें आप देखेंगे। कई तो खूबसूरत कारीगरी का नमूना हैं तो कुछ प्रकृति का नायाब उपहार प्रतीत होती हैं। भेड़ाघाट की संगमरमरीय वादियों से तो आप रू-ब-रू हो ही चुके हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे स्थान की ओर ले जा रहे हैं जो ताजमहल तो नही है लेकिन उससे कम भी नही है। गौरवांवित इतिहास और अनोखी कारीगरी का नमूना है होशंगशाह का मकबरा। यह मांडू के करीब धार से लगभग 35 कि. मी. की दूरी पर स्थित है। इसी मकबरे को देखकर शाहजहां ने ताजमहल की कल्पना को साकार किया।


tomb

यह मकबरा होशंगशाह के समय में ही बना था। ये वास्तु और शिल्प कला का यह बेजोड़ नमूना है। इस तथ्य का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि सन 1659 में शाहजहां ने अपने चार शिल्पकारों को इस मकबरे को बनाने वाले कारीगरों और निर्माणकर्ताओं से मिलने और शिल्पकला को देखने के लिए मांडू भेजा था। यह बात मकबरे के दरवाजे के एक पल्ले पर उस समय से लिखी हुई है। चारों शिल्पकारों में से एक उस्ताद हमीद ताजमहल के निर्माण से जुड़े हुए थे। होशंगशाह का मकबरा एक चबूतरे पर बना है। मकबरे की लंबाई और चौड़ाई एक समान 200 फीट है।


tomb

होशंगशाह का मकबरा एक ऐसा मकबरा है जो पूरी तरह संगमरमर से बना है। यद्यपि इसका प्रवेश द्वार मंडप उत्‍तर की ओर है लेकिन मकबरे में प्रवेश के लिए उपयुक्त अनुपात में बने एक अलंकृत दरवाजे से होकर पहुंचा जाता है जो दक्षिण की ओर है। होशंगशाह के मुख्‍य ताबूत को एक शवपेटिका के रूप में उत्‍कीर्णित किया गया है जिसमें पीछे की ओर झुकी हुई पटिट्यां हैं और शिखर पर एक मेहराब ढाला है। यहां इस गुम्‍बद के नीचे अन्‍य कब्रें भी हैं जिनमें से तीन सगमरमर से बनी हुई हैं।


मकबरे के परिसर के भीतर धर्मशाला है जो पश्चिम में स्थित है और इसके साथ जुड़ी हुई है। इसमें एक स्तंभवाली है जो स्‍तंभों की पंक्तियों से तीन गलियारों में विभाजित हो जाती है। स्‍तंभों, ब्रैकेटों और सरदलों पर टिकी चपटी छत ठेठ हिंदु वास्‍तुकला का प्रतीक है। इसके पीछे मेहराबी छत वाला एक लंबा संकरा हॉल वास्‍तुकला शैली में पूरी तरह से इंडो-इस्‍लामिक है।

ये भी पढ़ें

image
Story Loader