मकबरे के परिसर के भीतर धर्मशाला है जो पश्चिम में स्थित है और इसके साथ जुड़ी हुई है। इसमें एक स्तंभवाली है जो स्तंभों की पंक्तियों से तीन गलियारों में विभाजित हो जाती है। स्तंभों, ब्रैकेटों और सरदलों पर टिकी चपटी छत ठेठ हिंदु वास्तुकला का प्रतीक है। इसके पीछे मेहराबी छत वाला एक लंबा संकरा हॉल वास्तुकला शैली में पूरी तरह से इंडो-इस्लामिक है।