
Government School Toilets in Shambles
बालमीक पांडेय @ कटनी. सरकारी स्कूलों में खराब प्रसाधन व्यवस्था अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि बेटियों की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है, जर्जर शौचालय, टूटे दरवाजे और पानी की कमी से छात्राओं को रोज़ाना मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, कई स्कूलों में प्रसाधनों की हालत इतनी खराब है कि उनका उपयोग करना असंभव हो गया है, निजता और स्वच्छता के अभाव में बेटियां निस्तार के लिए मजबूर हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ रहा है, गंदगी और बदबू संक्रमण को खुला निमंत्रण दे रही है, सुरक्षा इंतजामों की कमी से छात्राओं में असहजता और डर का माहौल है, सरकारी दावों के विपरीत, जमीनी हकीकत चिंताजनक है…।
सरकार और शिक्षा विभाग भले ही सरकारी स्कूलों में शिक्षा स्तर और सुविधाओं में सुधार के दावे कर रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। जिले के सैकड़ों शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। कहीं बच्चों के बैठने के लिए पक्की छत नहीं है तो कहीं शुद्ध पेयजल तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा। सबसे गंभीर स्थिति स्कूलों में प्रसाधनों की है। जिले में ऐसे 276 प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल चिन्हित किए गए हैं, जहां शौचालय जर्जर हालत में हैं। कई स्कूलों में तो शौचालय हैं ही नहीं, और जहां हैं, वहां दरवाजे टूटे हुए हैं, कुंडियां खराब हैं और पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। गंदगी और बदबू के कारण वहां ठहरना तक मुश्किल हो जाता है।
ऐसी स्थिति में बच्चों, विशेषकर बालिकाओं को निस्तार के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। असुविधाजनक और अस्वच्छ प्रसाधनों के कारण बच्चों में संक्रमण फैलने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। यही नहीं, शिक्षकों और शिक्षिकाओं को भी इन हालातों में कार्य करना कठिन हो रहा है। अधिकांश स्कूलों में स्थायी सफाई कर्मी नहीं हैं और जहां नियुक्त हैं, वहां नियमित व समुचित सफाई नहीं हो पा रही है।
चिंताजनक बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद स्कूलों में स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं की प्रभावी निगरानी नहीं हो रही है। शिक्षा विभाग के कागजी दावे अपनी जगह हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि बदहाल प्रसाधन व्यवस्था बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा, तीनों पर प्रतिकूल असर डाल रही है। अब सवाल यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे और बच्चों को सम्मानजनक व सुरक्षित वातावरण कब मिलेगा। पत्रिका ने सोमवार को शहर व ग्रामीण पाठशालाओं की पड़ताल की तो हकीकत चौकाने वाली सामने आई…।
सिर्फ एक प्रसाधन जिसमें 312 छात्राएं निस्तार करती हैं, साथ ही इसी प्रसाधन पर शिक्षिकाओं को भी निस्तार करना पड़ता है। गंदगी से अटा पड़ा यह प्रसाधन नगर निगम कार्यालय के बाजू में नगर निगम के ही स्कूल केसीएस कन्या शाला का है। यहां पर सुरक्षा के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
यशोदा बाई माध्यमिक शाला हीरागंज में 103 छात्र-छात्रा अध्ययन कर रहे हैं। यहां पर 55 बेटियां पढ़ती हैं। स्कूल में सिर्फ एक प्रसाधन है। नगर निगम ने हाल ही में नया प्रसाधन तैयार करा रहा है जो कई माह से अधूरा है। पानी का भी इंतजाम स्कूल में नहीं हैं।
यह तस्वीर शासकीय उर्दू माध्यमिक शाला साधूराम स्कूल परिसर की है। यहां पर 48 दर्ज संख्या है व 16 बेटियां पढ़ रही हैं। स्कूल प्रभारी शहरुन निशा प्रधानाध्यापिका ने बताया कि प्रसाधन का गेट कोई चोरी कर ले गया है। असुरक्षित प्रसाधन में बच्चे निस्तार करते हैं।
प्राथमिक शाला कंचनपुर संकुल स्लीमनाबाद जनपद पंचायत बहोरीबंद के स्कूल की यह तस्वीर है। शौचालय उपयोग योग्य नहीं है। दो शौचालय हैं। एक बालक एक बालिका दोनों दुर्दशा का शिकार हैं। दरवाजे टूटे पड़े हैं, जिम्मेदारों को कोई सरोकार नहीं है।
ढीमरखेड़ा जनपद क्षेत्र के शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला मढ़ाना के स्कूल में प्रसाधन तो बना है, लेकिन प्रसाधन में छप्पर व शेड नहीं है। क्षतिग्रस्त हालत वाले प्रसाधन में बच्चे निस्तार के लिए जाते हैं। स्कूल के प्रभारी विजय यादव ने बताया कि प्रसाधन क्षतिग्रस्त है। इसको तोडकऱ नया बनवाने के लिए प्रस्ताव बना है। शीघ्र ही निर्माण होगा। आधा सैकड़ा से अधिक स्कूल में वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।
शासकीय उच्चतर माध्यमिकल मॉडल स्कूल विजयराघवगढ़ का प्रसाधन भी स्वच्छ नहीं है। में 331 बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। प्रसाधन गंदगी से अटा पड़ा है। स्कूल प्रबंधन द्वारा सफाई को लेकर ध्यान नहीं दिया जा रहा
जिले के 8 हाई व हॉयर सेकंडरी स्कूल ऐसे हैं जो जर्जर हालत में थे, जिनकी मरम्मत शिक्षा विभाग द्वारा कराई जा रही है। हालांकि इनमें से अधिक ऐसे हैं जिनका नवीन निर्माण हो रहा है। इसमें भजिया, पिपरौंध, बरहाटा, कुठला, पठरा, देवराखुर्द, जोबीकलां, निटर्रा स्कूल शामिल हैं, जहां पर निर्माण कराया जा रहा है।
बड़वारा विकाखखंड अंतर्गत आने वाले 6 स्कूलों में प्रसाधन की सुविधा नहीं है, जिनके निर्माणकी प्रक्रिया शुरू कराई गई है। इसके अलावा 104 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के प्रसाधन जर्जर हो गए थे, जिनके मरम्मत के लिए राशि जारी की गई है। कई जगह पर काम शुरू कराने का दावा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने किया है। इसके अलावा 172 स्कूलों की सूची मरम्मत कराने के प्रस्ताव की सूची राज्य शिक्षा केंद्र भेजी गई है, अभी स्वीकृति का इंतजार है। 8 मार्च के पहले स्कूलों के प्रसाधनों की मरम्मत कराये जाने का दावा किया जा रहा है।
जिले में बड़वारा ब्लॉक के सिर्फ 8 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें प्रसाधन नहीं हैं, उनका निर्माण हो रहा है। 104 स्कूल के प्रसाधन मरम्मत योग्य थे, जिनके लिए राशि जारी हो चुकी है। शेष 172 स्कूलों के शौचालयों की मरम्मत कराए जाने का प्रस्ताव राज्य शिक्षा केंद्र को भेजा गया है।
जिले के सभी 90 हाइ व 86 हॉयर सेकंडरी स्कूलों में प्रसाधन की सुविधा है। 7 से 8 स्कूलों के प्रसाधन मरम्मत योग्य थे, जिनकी मरम्मत कराई जा रही है। जिले के सभी स्कूलों में अलग-अलग प्रसाधन की सुविधा है। यदि किसी स्कूल में सफाई व सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं तो उनको दिखवाया जाएगा।
Updated on:
03 Feb 2026 10:23 am
Published on:
03 Feb 2026 10:06 am

बड़ी खबरें
View Allकटनी
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
