जबलपुर

जबलपुर में 4500 करोड़ से बनेंगे सेना के बम, तोप, हैंड ग्रेनेड

जबलपुर में 4500 करोड़ से बनेंगे सेना के बम, तोप, हैंड ग्रेनेड

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Mar 18, 2023
Jabalpur ordnance factories

जबलपुर. सेना के लिए कारतूस से लेकर तोप तक का निर्माण जबलपुर की चारों आयुध निर्माणियां कर रही हैं। नेवी और वायुसेना के लिए भी विध्वंसक हथियार तैयार किए जा रहे हैं। सेना को हथियारों के लिए यह संस्थान सबसे बड़े सप्लायर की भूमिका में हैं। इनका निर्यात तेजी से होने लगा है। यह निर्माणियां विदेशी मुद्रा अर्जित करने का जरिया भी बन रही हैं। इस साल जबलपुर की आयुध निर्माणियों को 4500 करोड़ की सैन्य सामग्री तैयार करनी है।

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कई तरह के हथियारों का निर्माण

ओएफके- टैंक भेदी बम, मोर्टार एमुनेशन, 30 एमएम बीएमपी-2, 84 एमएम एमुनेशन, 155 एमएम एमुनेशन, चार्ज डेमोलेशन, विध्वंसक एयर बम और कई तरह के फ्यूज।

जीसीएफ: 155 एमएम 45 कैलीबर धनुष एवं शारंग तोप। माउंटेड तोप, दो बैरल एंटी एयरक्राफ्ट गन, मोर्टार और टैंक के स्पेयर्स पार्ट्स।

वीएफजे: सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए वाहन। इनमें सुरंगरोधी वाहन खास।

जीआइएफ: एयर बम, हैंड ग्रेनेड की बॉडी ढलाई, शारंग तोप और टैंक के स्प्रॉकिट व्हील।

ऐसे समझें महत्व
आयुध निर्माणियों का इतिहास 200 साल पुराना है। ब्रिटिश शासनकाल में इनकी स्थापना हुई थी। अभी तक सेना के लिए खतरनाक हथियार, वाहन और तोप आदि का निर्माण कर रही हैं। जबलपुर में दो आयुध निर्माणियां विश्व युद्ध के पहले की हैं। दुनिया की सबसे बड़ी धनुष तोप बनाने वाली गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) की स्थापना 1904 में तो आयुध निर्माणी खमरिया (ओएफके) 1942 में शुरू हुई थी।

रक्षा अनुसंधान और विकास पर जोर

जबलपुर में दो अन्य आयुध निर्माणियां भी हैं। इनमें वीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) और ग्रे आयरन फाउंड्री (जीसीएफ) शामिल हैं। इसके अलावा कटनी और इटारसी में भी आयुध निर्माणियां हैं। शहर की आयुध निर्माणियां लगातार नए उत्पाद बना रही हैं।

Published on:
18 Mar 2023 11:56 am
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