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खूबसूरत पत्नी को शराब के लिए पति ने छोड़ा, अब आया ये मोड़

खूबसूरत पत्नी को शराब के लिए पति ने छोड़ा, अब आया ये मोड़

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beautiful wife in dirty position

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जबलपुर। शराब हो या किसी और प्रकार का नशा, ये जीवन को बर्बाद तो करता ही है। साथ में परिवारों व रिश्तों के लिए भी ये घातक साबित होता है। इसके बावजूद लोग नशे के प्रति बहुत ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा परिवारों में बिखराव का कारण शराब बन रही है। एक अनुमान के अनुसार फैमिली कोर्ट में तलाक या अन्य विवादों के पीछे चल रहे मामलों में लगभग आधे मामले शराब खोरी या अन्य नशे की लत को मुख्य वजह पाया गया है। ऐसे में नशा करने वाला व्यक्ति परिवार को नशे के लिए छोडऩे में जरा भी गुरेज नहीं करता है।

ताजा मामला जबलपुर निवासी एक दंपति का है। जिसमें सामने आया कि पति शराब पीने का आदि है, जिससे उसकी पत्नी दुखी रहती थी। शराब छोडऩे की बात पर पति ने पत्नी को ही छोड़ दिया। सालों से कोर्ट के चक्कर लगाने पर भी पति अपनी गलती नहीं स्वीकारी और पत्नी को घर नहीं आया। अंतत: दोनों का मामला विधिक सहायता केन्द्र के माध्यम से अधिवक्ता प्रियंका मिश्रा को सौंपा गया। उन्होंने मध्यस्थता कर पति की शराब से तौबा कराई, साथ ही पत्नी को साथ रखने के लिए राजी भी कर लिया। इस मामले की सभी सामाजिक संगठनों ने तारीफ की है।

यह है मामला-
अधिवक्ता प्रियंका मिश्रा ने बताया कि रांझी निवासी राजू अहिरवार का विवाह साल 2011 में निर्मला अहिरवार से हुआ था। दोनों के बीच कुछ दिनों तक सबकुछ ठीक चला, लेकिन अचानक से दोनों में विवाद होने लगे। विवाद के चलते निर्मला राजू से अलग रहने लगी और कोर्ट में भरण पोषण समेत धारा 498 ए का मामला दर्ज करा दिया। मध्यस्थता के दौरान पाया गया कि राजू शराब पीने का आदि है, वहीं निर्मला उसे शराब छोडऩे के लिए कहती थी। साथ में वह आगे पढ़ाई करने की बात कहा करती थी। जिसके चलते दोनों में विवाद होता था। निचली अदालत ने राजू को भरण पोषण राशि देने के आदेश दिए थे। जिसके बाद उसने ऊपरी अदालत में मामला लगा दिया था।
अधिवक्ता प्रियंका मिश्रा ने बताया कोर्ट के आदेश पर 21 अगस्त 2018 को दोनों के बीच मध्यस्थता कराई गई। जिसमें राजू ने निर्मला को आगे पढ़ाने के लिए खुशी से हां किया। वहीं शराब छोडऩे की बात भी कही। निर्मला ने भी केस वापस लेकर खुशी खुशी साथ में रहने की इच्छा जाहिर कर दी। दोनों राजी होने पर एक परिवार टूटने से बच गया।

प्रियंका मिश्रा ने कहा कि यहां एक बात उल्लेखनीय है कि फैमिली कोर्ट में अधिकतर मामलों में मध्यस्थता की जो परंपरा शुरू की गई है, वह बहुत ही सराहनीय है। यहां मध्यस्थों के द्वारा दोनों रुठे पति पत्नी को दोबारा अपना जीवन खुशी खुशी शुरू करने के लिए प्रेरित ही नहीं किया जाता, बल्कि एक संकल्प भी दिलाया जाता है कि परिवार में कितनी भी बड़ी परेशानी क्यों न आए, हमें साथ मिलकर उसका सामना करना होगा।