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देशभर में फेमस है यहां बनी बीड़ी, इस खास पत्ते ने दिलाई है पहचान

देशभर में फेमस है यहां बनी बीड़ी, इस खास पत्ते ने दिलाई है पहचान  

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bidi kaise banti hai

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जबलपुर। वैसे तो धूम्रपान करना सेहत के लिए अच्छा नहीं है। किंतु धूम्रपान करने के शौकीनों की जब बात होती है तो देशभर में जबलपुर का नाम एक और वजह से याद किया जाता है। वो है यहां बनने वाली बीड़ी। बीड़ी उद्योग यहां कभी प्रमुख रोजगार का साधन हुआ करता था, आज भी हजारों घरों में बीड़ी बनती हैं। परिवारों की रोजी रोटी भी इसी से चलती है। बीड़ी बनाने के लिए उपयोग आने वाला तेंदूपत्ता सबसे अच्छी किस्म का जबलपुर संभाग में ही पाया जाता है। तेंदूपत्ता की तुड़ाई और संग्रहण सरकार द्वारा कराया जाता है। जो बाद में बीड़ी फर्मों को उचित दामों को नीलाम कर दिया जाता है।

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वनपरिक्षेत्र सिहोरा का मामला : तेंदूपत्ता तोडऩे वाले मजदूर परेशान
वनकर्मियों की हड़ताल से तेंदूपत्ता संग्रहण का काम ठप

छाए संकट के बादल
शासन के तेंदूपत्ता संग्रहण के लक्ष्य पर संकट के बादल छाने लगे हैं। वनकर्मियों की बेमियादी हड़ताल पर जाने से वनपरिक्षेत्र सिहोरा में चल रहे तेंदूपत्ता संग्रहण ठप हो गया है। ऐसे में १५ जून तक बिना अमले के लक्ष्य पूरा करना आसान नहीं होगा। वनकर्मियों के हड़ताल पर जाने से तेंदूपत्ता संग्रहण में लगे मजदूर यहां से वहां परेशान हो रहे हैं। मजदूरी भुगतान नहीं होने से परिवार के सामने आर्थिक संकट मंडराने लगा है।

वन परिक्षेत्र सिहोरा के ३३ हेक्टेयर और राजस्व के ५ सौ हेक्टेयर एरिया में तेंंदूपता तोडऩे (संग्रहण) का काम शासन द्वारा कराया जाता है। १६ से २० मार्च तक तेंदूपत्ता के पेड़ों को चिन्हित किया जाता है। इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण काम एक मई से शुरू होकर २६ मई होना था। तेंदूपत्ता तोडऩे के बाद मजदूर उन्हें संबंधित फड़ में लेकर आते हैं। मजदूरों को प्रति सैकड़ा (एक हजार गड्डी) पर दो सौ रुपए मेहनताना दिया जाता है। तेंदूपत्ता को सूखने में गड्डी तैयार होने के बाद उसे सूखने में करीब सात से आठ दिन लग जाते हैं।

वनों में लगे तेंदूपत्ता को तोड़कर इकट्ठा करने का काम अतरिया, पाराखेड़ा, जौली, घुघरी, झींटी, हरगढ़, दिनारी खम्हरिया, गौरहा, घुटेही, हरदुआ, नांदघाट, सोमा-खुर्द, पड़वार, धनगवां, मुरैठ में वन विभाग करवाता है। तेंदूपता को तोडऩे के काम में अलग-अलग जगहोंं पर करीब तीन सौ से अधिक मजदूरों का लगाया गया था। तेंदूपता को तोडऩे के बाद गड्यिां तैयार की जाती हैं। एक गड्डी में करीब दो सौ तेंदूपत्ता होता है, जो दो सौ रुपए सैकड़ा के हिसाब से दिया बिकता है।

ये काम भी हो रहे प्रभावित
वनकर्मियोंं के हड़ताल पर जाने से वनों की सुरक्षा, वन क्षेत्र में वानिकी की तैयारी का काम, अवैध उत्खनन, वन्यप्राणियों की सुरक्षा, अवैध शिकार पर रोक, अवैध लकड़ी की कटाई का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

वनकर्मियों के हड़ताल पर जाने से तेंदूपत्ता संग्रहण का काम प्रभावित हुआ है। वैकल्पिक व्यवस्था बनाकर लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि जून के पहले सप्ताह तक तेंदूपत्ता संग्रहण का काम पूरा हो जाए।
लोकप्रिय भारती, अनुविभागीय अधिकारी, वन सिहोरा