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टीन-सीमेंट शीट के नीचे लग रहे आंगनबाड़ी,व्यवस्था नहीं होने से बच्चे हो रहे बीमार

केन्द्र में बच्चे भेजने से परिजन कर रहे किनारा

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children sic in Anganwadi

children sic in Anganwadi

जबलपुर। तीन से छह साल के बच्चों को स्कूल पूर्व शिक्षा देने और कुपोषित बच्चों को पौष्टिक आहार देने सुपोषित करने के उद्देश्य से संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों के हालात बहुत खराब हैं। विभाग के अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति में लगे हुए हैं। सिहोरा विकासखंड में लगने वाले आंगनबाड़ी केन्द्रों में न तो बिजली की व्यवस्था है न पंखे। भीषण गर्मी में नौनिहाल आंगनबाड़ी में पहुंचकर बीमार हो रहे हैं। ऐसे में परिजन भी बच्चों को केन्द्र भेजने से कतरा रहे हैं। पत्रिका ने केन्द्रों का जायजा लिया तो मुठ्ठी भर बच्चे केंद्र में मिले। व्यवस्था के नाम पर शासकीय राशि का दुरूपयोग हो रहा है।
स्थान: आंगनबाड़ी केन्द्र क्रमांक 137, वार्ड नंबर 13


समय दस बजे
छोटे से कमरे में लग रहे केंद्र में नौनिहाल नाश्ता करने के बाद बिना बिजली और पंखे पसीने के बीच बैठे थे। मिट्टी-ईट से जुड़े छोटे से भवन के ऊपरी हिस्से को टीन से ढंका गया था, ताकि धूप अंदर नहीं आए। केंद्र में 14 बच्चे मौके पर थे। सहायिका रामसखी दाहिया से पूछने पर पता चला कि कार्यकर्ता निशा नामदेव के बेटे की तबीयत खराब होने पर वह घर चली गई है। भवन किराए से तो है लेकिन किराया करीब एक साल से नहीं मिला। इस केंद्र में बच्चों की दर्ज संख्या 25 के लगभग है।


स्थान: आंगनबाड़ी केन्द्र क्रमांक 139, वार्ड नंबर 09
समय 11 बजे
बच्चे बाहर खेल रहे थे। रिपोर्टर को देखते ही कार्यकर्ता चंद्र ज्योति सतनामी बच्चों को अंदर कमरों में ले जाने लगी। सीमेंट की चादर की छत और छोटे से कमरे में बैठने तक की जगह ढंग से नहीं थी। गर्मी के कारण नौनिहाल पसीना पोछ रहे थे। सहायिका प्रीति चौधरी भी कुछ देर में पहुंच गई। जानकारी लेने पर पता चला कि यहां बच्चों की दर्ज संख्या 51 हैं लेकिन मौके पर सिर्फ 12 बच्चे थे। खाना मिलने की आस पर बच्चे ग्लास लेकर लाइन से बैठ गए।


स्थान आंगनबाड़ी केन्द्र क्रमांक 133, वार्ड नंबर 15
समय 11.30 बजे
आंगनबाड़ी केन्द्र मंदिर की मढिय़ा में लगा था। यहां पर सिर्फ 8 बच्चे मौके पर थे। बिजली और पंखा नहीं होने से कई बच्चे केंद्र आए ही नहीं। जबकि यहां दर्ज बच्चों की संख्या 30 है। कार्यकर्ता शहनाज खान मोबाइल पर बात कर रही थी। रिपोर्टर को देखते ही फोन बंद कर समस्या बताने लगीं। सहायिका ममता कोल मौके से गायब थीं। बच्चों को नाश्ते में नमकीन और दलिया खिला दिया गया था लेकिन मौके पर देखने में ऐसा कुछ भी नहीं लगा।


खास-खास
नगरीय क्षेत्र में 24 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। मात्र 12 आंगनबाड़ी केंद्रों के पास ही खुद के भवन है। 500 वर्ग फुट कमरा, बिजली, प्रशासन पर होता है अनुबंध। विभाग ने नए अनुबंध के लिए भेजी लिस्ट, नहीं मिल रहे कमरे।


क्या कहते हैं जिम्मेदार
जो आंगनबाड़ी केन्द्र किराए के भवन में लग रहे हैं। वे मानक के अनुसार नहीं हैं। आंगनबाड़ी भवन का किराया शासन ने तीन हजार रुपए निर्धारित किया है। लेकिन कार्यकर्ता मानक के अनुसार भवन नहीं ढूंढती।
इंद्र कुमार साहू, परियोजना अधिकरी महिला एवं बाल विकास सिहोरा

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