जबलपुर में स्वच्छता अभियान की निकली हवा, चौपट हो गए 5 करोड़ के टॉयलेट
जबलपुर। सार्वजनिक स्थानों के आसपास सफाई रखने के लिए बनाए गए 60 आत्याधुनिक टॉयलेट किसी काम के नहीं बचे हैं। तीन साल के भीतर 5 करोड़ की लागत से बनाए गए ये टॉयलेट जर्जर हो गए हैं। सुविधा के अभाव में इन टॉयलेट का इस्तेमाल नहीं हुआ। जानकार कहते हैं कि निगरानी नहीं होने से इन टॉयलेट की सामग्री गायब हो गई। किसी का दरवाजा गायब है तो कहीं छत नहीं बची। वॉशबेसिन, नल आदि नदारद हैं।
निगरानी का अभाव, स्वच्छता अभियान के तहत 60 जगह बने थे
स्वच्छता अभियान के तहत शहर को साफ रखने में कई प्रयोग किए गए हैं। इसमें कचरे से लेकर प्रसाधन को फोकस किया गया था। सार्वजनिक स्थानों की सडक़ किनारे टॉयलेट बनाए गए। आठ लाख रुपए की लागत से एक टॉयलेट बनाया था। इसमें शौचालय के साथ पानी की व्यवस्था की गई थी। निगरानी नहीं होने से ये टॉयलेट बंद हो गए।
जोन अधिकारी को सौंपी थी जवाबदारी
टॉयलेट की देखरेख और सुरक्षा के लिए वार्ड और जोन स्तर पर जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसमें जोन प्रभारी से लेकर वार्ड अधिकारी तक जिम्मेदार हैं। अधिकारियों का दावा था कि टॉयलेट की मॉनीटरिंग से लेकर मरम्मत कराई जाती थी, लेकिन समय गुजरने के साथ कई जगहों से इनका अस्तित्व खत्म हो गया है। जानकार कहते हैं कि यहां नियमित रूप से निगरानी नहीं रखी गई है, जिससे यहां अवांछित तत्वों की मौजूदगी से व्यवसथाएं टूट गईं।
हुई थी मरम्मत
निगम के जिम्मेदारों का कहना है कि छह माह पहले इन टॉयलेट की मरम्मत की थी। इसमें ढांचा सहित सुविधाएं बनाई गई थीं। कुछ जगहों पर पानी की भी व्यवस्था की गई है। जानकार कहते हैं कि इन जगहों की निगरानी नहीं होने से व्यवस्थाएं चौपट हो गई हैं। हालात जस के तस हो गए हैं।
एमआर-4 के आदर्श नगर मोड़ पर पेवर ब्लॉक्स लगाए गए थे, ताकि टॉयलेट तक लोग पहुंच सके।
अहिंसा चौक के पास फुटपाथ पर टॉयलेट में दरवाजे लगाए गए थे ताकि इसका उपयोग हो सके।
कृषि उपज मंडी गेट के पास टॉयलेट तक पहुंचने के लिए गड्ढा पूरा गया था, वहां रैम्प बनाया गया है।
अधिकांश टॉयलेट में अवांछित तत्वों ने सामान गायब कर दिया है, जिससे स्थिति बिगड़ी है। हम सुधार करवा रहे हैं।
- भूपेंद सिंह, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम