
Ranjhi water treatment plant
जबलपुर . रांझी जलशोधन संयंत्र के क्लीयर वाटर टैंक की मरम्मत का मुहूर्त अभी तक नहीं निकल पाया है। क्षतिग्रस्त टैंक से पानी की सप्लाई शहर के 16 वार्डों में हो रही है। इसमें बड़ी मात्रा में मलबा जम गया है। बाहर का कचरा भी उड़कर उसमें आ रहा है। नगर निगम ने केवल जहां बडे़ छेद हो गए हैं, वहां प्लास्टिक का नेट लगाया है।
शहर को शुद्ध पानी देने का दावा करने वाला नगर निगम टैंक नया निर्माण नहीं करवा पाया है। 120 लाख गैलन क्षमता वाले रांझी जलशोधन संयंत्र में परियट जलाशय से पानी आता है। उसकी रासायनिक प्रक्रियाओं के तहत सफाई की जाती है। उसके पास साफ पानी पंप हाउस के पीछे बने क्लीयर वाटर टैंक मे जाता है। वहां वह मलबे से दूषित हो रहा है। टैंक की छत टूटकर उसमें समा गई है। टैंक की सफाई भी नगर निगम नहीं करवा पा रहा है।
निर्माण की योजना में देरी
दूसरे क्लीयर वाटर टैंक के निर्माण की योजना में देरी हो रही है। लोगों को जर्जर टैंक का पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जब ज्यादा प्रेशर से टैंक में जल शोधन संयंत्र से पानी आता है तो मलबे की गंदगी पानी में घुल जाती है। यही पानी लोगों के घरों तक सप्लाई हो रहा है। एक दशक से पड़ा है खराब यह टैंक एक दशक से क्षतिग्रस्त है। कई जगह पर टैंक में छेद हो गए हैं। कुछ जगहों पर टीन लगाए गए हैं। अभी नेट से इसे ढंका गया है। टैंक के चारों तरफ नेट लगाया गया है। पहले अमृत योजना एक के तहत योजना बनी थी लेकिन वह फेल हो गई।
इन वार्डों में हो रही सप्लाई
रांझी जलशोधन संयंत्र से पानी की सप्लाई बडे़ क्षेत्रफल में होती है। पानी डॉ. भीमराव अम्बेडकर वार्ड, शहीद भगत सिंह, महर्षि सुदर्शन, चंद्रशेखर आजाद, गोकलपुर, लाला लाजपत राय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सिद्धबाबा, शीतलामाई, आचार्य विनोबा भावे, डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन, खेरमाई और हनुमानताल वार्ड के अलावा अन्य जगह पर पानी जाता है। आयुध निर्माणी और इंजीनियरिंग कॉलेज में भी यहीं से पानी जाता है।
Published on:
13 Apr 2023 10:31 pm
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